पटना: पटेल नवनिर्माण सेना (पनसे) के अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने यहां शनिवार को कहा कि कुर्मी, कुशवाहा और धानुक जाति के लोग एक हो जाएं तो किसी की नहीं चलेगी. हार्दिक ने खुद का नाम भी बदलते हुए कहा कि ‘मेरा नाम कुर्मी धानुक हार्दिक पटेल’ है. गुजरात से आए हार्दिक ने पटना में पटेल जागरूकता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा, “इस बार नीतीश चाचा ने मुझे इसलिए नहीं बुलाया कि दिल्ली वाले नाराज हो जाएंगे. मैं कहूंगा कि चाचा हमसे क्यों डर गए? हम नालंदा से चुनाव नहीं लड़ने वाले हैं.” Also Read - बिहार में उद्घाटन से पहले पुल टूटने पर विपक्ष ने घेरा, तेजस्वी बोले- मुख्यमंत्री बना रहे पुल टूटने का रिकॉर्ड

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अलग रास्ता चुनने के बाद उनसे नाता तोड़ लेने की बात कहते हुए गुजरात के पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने शनिवार को कुर्मी , धानुक , कुशवाहा जाति के लोगों से एकजुट होने को कहा ताकि सामाजिक और राजनैतिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकें. पटेल ने कहा कि इस एकता के अभाव में दूसरे उनपर राज करते रहेंगे. पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पास) के नेता ने यह भी घोषणा की कि वह दो साल बाद ऐतिहासिक गांधी मैदान में विशाल रैली आयोजित करेंगे. Also Read - Bihar Flood: बिहार में बाढ़ से जनजीवन प्रभावित, इन जिलों में हालत खराब

मतलब यह नहीं है कि मैं नीतीश का शत्रु हूं
गुजरात की पाटीदार जाति को बिहार की कुर्मी जाति के समान माना जाता है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इसी जाति से आते हैं. गुजरात के युवा नेता ने पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में पटेल जागरूकता सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा, ” हम (नीतीश और वह) एक ही राह पर चल रहे थे, लेकिन उन्होंने खुद के लिए अलग रास्ता चुना, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि मैं उनका (नीतीश का) शत्रु हूं. पटेल ने कहा, ” कुर्मी, कुशवाहा और धानुक के नाम पर हमारे बीच विभाजन पैदा किया जा रहा है. अगर हम एकजुट हो गए तो कोई भी हमारे सामने खड़ा नहीं हो पाएगा, हमें अपने बीच की खाई को पाटने की जरूरत है अन्यथा दूसरे हमपर राज करेंगे.”

मेरा नाम कुर्मी, कुशवाहा, धानुक हार्दिक पटेल
शुरूआत में अपने भाषण में पटेल ने अपना परिचय देते हुए कहा, ”मेरा नाम है कुर्मी, कुशवाहा, धानुक हार्दिक पटेल.” उन्होंने कहा कि बिहार की तरह ही गुजरात में भी पटेल बंटे हुए थे , लेकिन उनकी एकता ने दुनिया को उनकी ताकत से अवगत कराया.

10 लाख कुर्मियों को रैली में बुलाऊंगा
हार्दिक ने कहा, ”एक रैली (कुर्मी चेतना रैली) 1994 में ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित की गई थी. दो साल बाद मैं उसी मैदान में उसी तरह की रैली आयोजित करूंगा, जिसमें 10 लाख कुर्मियों को आमंत्रित किया जाएगा — मैं एक महीना बिहार में रहूंगा और गांवों का दौरा करूंगा ताकि मैदान को 10 लाख लोगों से भर सकूं.”

नालंदा से चुनाव लड़ने की मंशा नहीं
गुजरात के पटेल ने कहा, ”मुझे नहीं पता कि कोई मेरी घोषणा को पसंद करता है या नहीं , लेकिन मैं इसकी परवाह नहीं करता हूं, क्योंकि मेरी नालंदा (लोकसभा क्षेत्र) से चुनाव लड़ने की मंशा नहीं है. मैं अब भी चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हूं.” बता दें कि नालंदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला है.
प्रशासन पर लगाया आरोप
हार्दिक ने आरोप लगाया कि इस सम्मेलन में लोगों को आने से रोकने की प्रशासन की तरफ से काफी कोशिश की गई. जगह-जगह नाकाबंदी की गई, फिर भी बड़ी संख्या में लोग सम्मेलन में पहुंचे.

विशेष राज्य के दर्जे पर भी की बात
हार्दिक ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग का जिक्र करते हुए कहा, “विशेष राज्य के दर्जा के लिए अगर नीतीश डटकर खड़े हुए तो हम भी बिहार की 12 करोड़ जनता के साथ उनकी मदद के लिए आएंगे, लेकिन अगर इसके बहाने वे सिर्फ अपना चेहरा चमकाएंगे तो कोई भी उनके साथ नहीं रहेगा.” उन्होंने कहा कि बिहार पिछड़ा राज्य है. अब बारिश के दिनों में अधिकांश हिस्से बाढ़ से त्रस्त हो जाएंगे. हार्दिक ने स्वामीनाथ आयोग की सिफारिश लागू न करने को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा.
(इनपुट- एजेंसी)