देहरादून: कांग्रेस महासचिव के पद से चार दिन पहले इस्तीफा देने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने रविवार को सक्रिय राजनीति छोड़ने का संकेत द‍िया है. उन्‍होने कहा कि वह अपनी पारी खेल चुके हैं और अब अपने परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना चाहते हैं. वहीं, ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया ने कांग्रेस महासचिव के पद से इस्‍तीफा दे दिया है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव पद के इस्‍तीफा देने के बाद सिंधिया ने कहा, जनता के फैसले के स्‍वीकारते हुए और जिम्‍मेदारी लेते हुए मैंंने एआईसीसी के जनरल सेक्रेटी के पद से इस्‍तीफा राहुल गांधी को सौंप है. मैं उन्‍हें यह जिम्‍मेदारी देने के साथ मुझ पर भरोसा करने के लिए और पार्टी की सेवा करने का अवसर देने के लिए धन्‍यवाद देता हूं.

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव के इस्‍तीफे के बाद सिंधिया ने कहा, मैंने आज इस्‍तीफा नहीं दिया. मैंने अपना इस्‍तीफा 8-10 दिन पहले दे दिया था. उन्‍होंने कहा कि मैं एक ऐसा नेता नहीं हूं जो दूसरों को आदेश देता है. मैं सोचता हूं कि जब यह एक जिम्‍मेदारी है, तो वहां जवाबदेही आ जाती है. यहां तक कि मैं जिम्‍मेदार हूं यदि प्रदर्शन अच्‍छा नहीं है और इसलिए मैंने इस्‍तीफे का निर्णय किया.  सिंध‍िया के बयान के  कुछ ही घंटे पहले मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं.

बता दें कि ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया अपनी स्‍वयं की सीट गुना से लोकसभा चुनाव हार चुके हैं. उन्‍हें पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के प्रभारी की भी जिम्‍मेदारी चुनाव से पहले सौंपी गई थी. वहीं, बीती तीन जुलाई को कांग्रेस महासचिव पद से इस्तीफा देने के अपने फैसले को सोशल मीडिया के जरिये साझा करने वाले उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने इसकी वजह हाल में लोकसभा चुनावों में असम में पार्टी को मिली करारी हार बताई. रावत असम में पार्टी मामलों के प्रभारी थे.

अपने ट्वीट में रावत ने लिखा था, मैंने अपनी कमजोरी महसूस की है और महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया है. यहां एक बातचीत में रावत ने कहा कि वह अपनी पारी खेल चुके हैं और अब अपने परिवार तथा मित्रों के साथ समय बिताना चाहते हैं. चुनावी दृष्टि से रावत के लिए पिछले कुछ साल अच्छे नहीं रहे और उनके बयानों को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है.

रावत ने इस बार उत्तराखंड की नैनीताल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के हाथों पराजय का सामना करना पड़ा. इससे पहले भी, उनके मुख्यमंत्री रहते हुए 2017 राज्य विधानसभा चुनावों में भी न केवल कांग्रेस महज 11 सीटों पर सिमट गई, वह खुद भी दोनों विधानसभा सीटों, हरिद्वार ग्रामीण और किच्छा से चुनाव हार गए थे.

हालांकि, यह पूछे जाने पर कि क्या वह राजनीति से संन्यास लेने का संकेत दे रहे हैं, रावत ने इसका सीधा जवाब न देते हुए कहा कि वह कांग्रेस पार्टी तथा जनता की सेवा करते रहेंगे और सेवा करने के लिये किसी पद की दरकार नहीं होती.

लोकसभा चुनाव का परिणाम आने के बाद से रावत देश तथा प्रदेश में जगह-जगह भ्रमण कर रहे हैं. इस संबंध में पूछे जाने पर रावत ने कहा कि इसके जरिए वह यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस की दृष्टि से लोकसभा चुनावों में आखिर क्या गलत हो गया.

रावत ने कहा कि एक नेता में अपने कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायी गुण होने चाहिए और राहुल गांधी में ये गुण हैं. उन्होंने कहा कि उनका विश्वास है कि अगर राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बने रहे तो 2022 में कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों में स्थिति बदली जा सकती है.