नई दिल्ली: देशभर में कोरोना वायरस ने अपने पांव पसार लिए हैं. इस महामारी के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए सरकार तमाम कोशिशें कर रही हैं. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री हर्षवर्धन ने रविवार को वैज्ञानिकों से कहा कि वे कोविड-19 का प्रभाव कम करने के तरीके तय समयसीमा को ध्यान में रखते हुए विकसित करें क्योंकि यह ‘युद्धकाल है और इसे नियमित शोध परियोजना की तरह नहीं लिया जाना चाहिए. Also Read - जल्द आने वाला है कोरोना का टीका! केंद्र ने राज्यों से कहा- सुचारु टीकाकरण के लिए समिति गठित करो

एक बयान में बताया गया कि हर्षवर्धन ने विज्ञान एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद के महानिदेशक शेखर मांडे और सभी 38 सीएसआईआर प्रयोगशालाओं के निदेशकों के साथ एक समीक्षा बैठक की. इसमें सीएसआईआर के वैज्ञानिकों से उन्होंने कोविड-19 का इलाज तय समयसीमा को ध्यान में रखते हुए विकसित करने को कहा. Also Read - योगी आदित्यनाथ का वादा, 'कोरोना खत्म होने पर हर गांव के व्यक्ति को कराएंगे अयोध्या में कारसेवा'

मंत्री ने कहा, ‘‘यह युद्धकाल है, सीएसआईआर के वैज्ञानिकों को युद्ध खत्म होने से पहले समाधान खोजकर देना है, उन्हें इसे नियमित शोध परियोजना मानकर नहीं चलना है.’’ Also Read - दिल्ली में बहाल होगी इंटरस्टेट बस सेवा, डीटीसी और क्लस्टर बसों में 20 सवारियों की लिमिट खत्म

बता दें कि देश में अब तक 9,205 कोरोना के मामले सामने आए हैं और इस महामारी से मरने वालों की संख्या बढ़कर 331 हो गई है. कोरोना के बढ़ते मामले को देखकर स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कोरोना वायरस से लड़ाई के खिलाफ सरकार तैयार है. उन्होंने कहा, “हमें 1,671 क्रिटिकल केयर या ऑक्सीजन बेड की जरूरत है”. वहीं मंत्रालय ने कहा है कि 600 कोविड अस्पतालों में 1,05,000 बेड रोगियों के लिए उपलब्ध हैं.

इस दौरान गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि सभी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “एमएचए कंट्रोल रूम में आवश्यक वस्तुओं के बारे में स्थिति नियंत्रण में है, नागरिक उड्डयन मंत्रालय, उपभोक्ता मामले और रेलवे के अधिकारी लॉजिस्टिक समस्याओं के समाधान के लिए राज्यों के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं.