सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पंजाब उदास, हरियाणा की बल्ले-बल्ले

कोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि वह यमुना सतलज लिंक समझौते को रद्द नहीं कर सकती है।

Published date india.com Updated: November 10, 2016 8:21 PM IST
haryana CM Manohar Lal Khattar welcome of Supreme Court decision, punjab CM prakash singh badal sad | सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पंजाब उदास, हरियाणा की बल्ले-बल्ले

सतलुज-यमुना विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जहां पंजाब बौखलाया हुआ है वहीं हरियाणा ने इसका स्वागत किया है। इस फैसले के बाद जहां दोनो राज्य आमने-सामने हैं वहीं केन्द्र सरकार के लिये असमंजसकी स्थिती बनी हुई है।

इस फैसले के विरोध में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री, कांग्रेस अध्यक्ष और वर्तमान में अमृतसर से सांसद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया है।

तो वहीं दूसरी ओर हरियाणा के पक्ष में आए इस फैसले का मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने स्वागत करते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल से अपील की है कि वे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गए निर्णय का सम्मान करें। यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और काँग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह ने दिया लोकसभा से इस्तिफ़ा

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कोर्ट ने इस मामले में निर्णय दिया है कि हरियाणा की अनदेखी नहीं की जा सकती है। कोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि वह यमुना सतलज लिंक समझौते को रद्द नहीं कर सकती है।

इस आदेश से पहले बादल सरकार दावा कर चुकि थी कि वह किसी भी समझौते को मानने के लिये तैयार नहीं है लेकिन कोर्ट ने समझौते को लागू करने की दिशा में कदम आगे बढ़ाने का दे दिया है।

वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह और अन्य कांग्रेसी विधायकों द्वारा दिये गए इस्तीफे को पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाशसिंह बादल ने राजनीतिक नौटंकी बताया है।

चार लाईनों में समझे सतलुज-यमुना विवाद का पूरा मामला…

हरियाणा से पानी समझौता तोड़ने वाला पंजाब का 2004 का कानून मान्य नहीं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन होगा। सुप्रीम कोर्ट ने नहर का काम पूरा करने को कहा था।

गौरतलब है कि 2002 और 2004 में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब की तरफ पड़ने वाली नहर के हिस्से को पूरा करने को ज़िम्मेदारी केंद्र सरकार को दी थी।

2004 में पंजाब ने पानी समझौते को रद्द करने का कानून पास कर दिया। राष्ट्रपति ने पूछा था कि क्या कोई राज्य एकतरफा ऐसा कदम उठा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के ‘न’ कहने के बाद अब हरियाणा सरकार को पुराने फैसले के अमल के लिए औपचारिक आदेश लेना होगा। कोर्ट ने आज जो कहा है उसे राष्ट्रपति की तरफ से भेजे गए सवाल का जवाब माना जाएगा।

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