नई दिल्ली: हरियाणा कांग्रेस में पार्टी और राज्य के नेताओं के बीच अब भी दरार बनी हुई है. विधानसभा चुनाव से पहले समिति की बैठकों में नेता पहुंचने को तैयार नहीं हैं. प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एचपीसीसी) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर भी बीते दिनों हुई कई बैठकों में भाग लेने नहीं पहुंचे. बुधवार को कांग्रेस के वॉर रूम में अभियान समिति की बैठक बुलाई गई थी और इस मीटिंग में घोषणा पत्र समिति के सदस्य रहे तंवर अनुपस्थित थे.

एक बातचीत में तंवर ने बताया कि बैठकों में शामिल नहीं होने के बारे में वह गुरुवार को पर्दा हटाएंगे. विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य में चुनाव समिति की बैठक बुलाई गई है. इस बैठक का आयोजन पुराने कांग्रेस कार्यालय में की गई है लेकिन तंवर के करीबियों के मुताबिक वे इस बैठक में भी शामिल नहीं होंगे. तंवर ने उसी समय दिल्ली में एक और बैठक बुलाई है. बुधवार को जब वह राष्ट्रीय राजधानी में थे, तब वे अभियान समिति की बैठक में शामिल नहीं हुए थे.

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इस महीने की शुरुआत में, पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कुमारी शैलजा को तंवर और हुड्डा खेमे के बीच अनबन के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया गया था. घोषणापत्र समिति की बैठक में तंवर की अनुपस्थिति के बारे में पूछे जाने पर शैलजा ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी. उन्होंने कहा, ‘केवल एक नेता की अनुपस्थिति को क्यों इंगित किया जाता है. बैठक में बाकी और नेता मौजूद थे जिनसे कई मुद्दों पर चर्चा की गई.

एक बातचीत में अशोक तंवर ने यह कहते हुए सुझाव दिया कि जो लोग लगातार चुनाव हार रहे हैं, उन्हें पार्टी का टिकट नहीं दिया जाना चाहिए और नए चेहरों को मौका दिया जाना चाहिए. हरियाणा में 10 लोकसभा सीटों पर हार जाने के बाद पार्टी में कलह की स्थिति कांग्रेस के लिए अच्छा संकेत नहीं है. वे भी तब जब कांग्रेस पार्टी हरियाणा में अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है.

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