कोच्चि: केरल के विभिन्न हिस्सों खासतौर से उत्तरी इलाकों में मंगलवार सुबह भारी बारिश हुई, जिससे लोगों की मुसीबतें और बढ़ गईं. राज्य में 30,000 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. स्थिति के मद्देनजर ज्यादातर स्थानों पर शैक्षिक संस्थानों ने मंगवार को अवकाश घोषित किया है. आपदा नियंत्रण कक्ष के सूत्रों ने बताया कि वायनाड, कोझिकोड, मलप्पुरम, कन्नूर, कासरगोड और पलक्कड में भारी बारिश हो रही है. इनमें से ज्यादातर स्थानों पर  भूस्खलन की खबरें सोमवार को भी आईं हैं. बीते 6 दिनों से हो रही बारिश कहर बनकर बरस रही है.

सीएम पिनरायी विजयन ने  कहा कि भारी बारिश के कारण 20,000 से ज्यादा मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, सड़कों का 10 हजार किमी तक के हिस्से बह गए और राज्य भर में 30,000 लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं. दक्षिणी राज्य में आठ अगस्त से भारी बारिश हो रही है.

– सरकार ने राज्य द्वारा आयोजित किए जाने वाले वार्षिक ‘ओणम’ समारोहों का आयोजन ना करने और इसके लिए दी जाने वाली धनराशि का इस्तेमाल राहत उपायों में करने का फैसला किया है.
24 घंटे में भीषण बारिश का अनुमान
मौसम विज्ञानियों ने मंगलवार को क्षेत्र में आंधी-तूफान का अनुमान जताया है. केरल में अगले 24 घंटों में भारी से भीषण बारिश का अनुमान जताया गया है, जिससे लग रहा है कि लोगों की परेशानियां जल्द खत्म होने वाली नहीं है.

बांधों से पानी छोड़ने से बिगड़ेंगे हालात
बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित वायनाड के कई इलाके पूरी तरह डूबे हुए हैं और जिले में बानसुरा बांध में जल स्तर मंगलवार सुबह पांच बजे तक 775.60 मीटर के स्तर पर पहुंच गया. अगर और पानी छोड़ा गया तो हालात बदतर हो जाएंगे. वायनाड में 13,461 लोग 124 शिविरों में रह रहे हैं. इडुक्की बांध में जलस्तर घटने के चलते 5 में से 3 गेट बंद कर दिए गए हैं, जिन्हें 26 साल बाद खोला गया था. बहरहाल, चिंता की बात यह है कि इडुक्की जिले में मुल्लापेरियार बांध में जलस्तर बढ़ रहा है. बांध में जलस्तर 136.10 फुट पर पहुंच गया जबकि इसकी अधिकतम क्षमता 142 फुट है.

बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुए
केरल के उत्तरी पहाड़ी जिले वायनाड में रातभर बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुए और बाढ़ आई, जिससे हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा. अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि जिले के पश्चिमी घाट में भूस्खलन और जमीन धंसने के कारण कई लोगों को सोमवार को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा. वहीं, निचले इलाकों में रह रहे लोगों को राहत शिविरों में भेजा गया है. जिले में 124 राहत शिविरों में 13,800 से अधिक लोगों को शरण दी गई है. निचले इलाके डूब गए हैं.

केरल के कई हिस्सों में सोमवार को मूसलाधार बारिश हुई जिससे जमीन धंसने के कारण पहले से ही परेशान लोगों की मुसीबतें और बढ़ गई हैं. राज्य में बारिश के कारण छह दिनों में 39 लोगों की मौत हो चुकी है. गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया केंद्र (एनईआरसी) ने बताया कि केरल में मानसून से संबंधित घटनाओं में 187 लोगों की जान जा चुकी हैं. वहीं 14 जिलों में 2,406 गांव बारिश और बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं तथा 26,400 हेक्टेयर से अधिक की फसल बर्बाद हो गई है.

कुछ ऐसी है स्थिति, जाने एक नजर में

– प्रशासन ने बताया कि अलर्ट जारी कर दिया गया है और लोगों को आगाह कर दिया गया है.
– पंपा नदी में जल स्तर बढ़ने के कारण अयप्पा श्रद्धालुओं को सबरीमला तीर्थयात्रा ना करने की सलाह दी गई है.
– त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष ए पद्मकुमार ने कहा, ” पूजा कल निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी”
– तीर्थयात्रा पर आ रहे लोग इस बात से अनजान है कि निलाक्कल में ठहरने पर पाबंदियां हैं
– मंदिर का प्रबंधन करने वाले टीबीडी, जिला प्रशासन और पुलिस ने श्रद्धालुओं के लिए अलर्ट जारी किया है और जल स्तर घटने तक उन्हें विभिन्न स्थानों पर रोकने का फैसला किया है.
– सबरीमला की तलहटी में बहने वाली पंपा नदी में भी बाढ़ आ गई है, जिससे इमारतें और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई हैं तथा बिजली के खंभे उखड़ गए हैं.
– राज्य में आठ अगस्त से बारिश का कहर जारी है जिसमें 39 लोगों की जान जा चुकी है
– मछुआरों को समुद्र में ना जाने की चेतावनी दी गई है
– बानसुरा सागर बांध से क्षमता से अधिक पानी निकालने के लिए सोमवार रात उसके द्वार खोले गए
– कन्नूर, कासरगोड, कोझिकोड, मलप्पुरम और पलक्कड़ समेत उत्तरी केरल जिलों के कई हिस्सों में भी बीती रात बारिश हुई
– इडुक्की जलाशय से संबद्ध चेरुथोनी बांध के दो द्वार सोमवार शाम बंद कर दिए गए

– बांध में पानी का स्तर घट रहा है, जिससे निचले इलाकों खासतौर से एर्नाकुलम जिले में लोगों के प्रभावित होने का डर कम हो रहा है
– हालांकि, मुल्लापेरियार बांध में जल स्तर 136 फुट पर पहुंच गया है, जिससे अधिकारियों को अलर्ट जारी करना पड़ा.
– बांध के तलहटी क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है

– त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड ने पंबा नदी में तेजी से जल स्तर बढ़ने के कारण श्रद्धालुओं को सबरीमाला तीर्थयात्रा ना करने की सलाह दी है.
– मलप्पुरम, कोझिकोड, इडुक्की और वायनाड जिलों में विभिन्न स्थानों पर भूस्खलन की खबरें हैं