नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय से पूछा है कि उन्होंने राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बेटे, दामाद और बहू पर लगे धनशोधन मामले की जांच को लेकर क्या कदम उठाया है. इन तीनों पर आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी के मालिकाना हक वाली कंपनी के साथ मिलकर षड़यंत्र करने का आरोप है. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायाधीश वी.के. राव की एक पीठ ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह 17 तारीख तक अदालत को यह बताएं कि उन्होंने इस संबंध में क्या कार्रवाई की है.

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पीठ ने चार दिसंबर के अपने आदेश में कहा था, ”अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल मनिंद्र आचार्य ने पूछे गए सवाल के संबंध में की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी देने के लिए दो सप्ताह का समय मांगा था और उन्हें इसकी अनुमति दे दी गई.”

अदालत का यह निर्देश वकील पूनम चंद भंडारी द्वारा दायर की गई याचिका पर आया है. उन्होंने अपनी याचिका में पूछा था कि प्रवर्तन निदेशालय ने इस संबंध में क्या कार्रवाई की है, क्योंकि निदेशालय ने 12 अक्टूबर को अदालत में कहा था कि वह आरोप की जांच बस पूरा ही करने वाले हैं.

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प्रवर्तन निदेशालय ने 12 अक्टूबर को अदालत को बताया था कि यह जांच लगभग पूरी होने वाली है और जैसे ही यह समाप्त होगी, इसके बाद हम इस मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेंगे.