नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन ने रविवार को कहा कि भारत में कारोना वायरस के ‘स्ट्रेन’ में कोई बड़ा या महत्वपूर्ण बदलाव नहीं पाया गया है . उन्होंने कहा कि आईसीएमआर कोविड-19 संक्रमण का पता लगाने के लिए लार आधारित जांच कराने के विषय में सक्रियता से इसकी पड़ताल कर रहा है.Also Read - Covid 19 Third Wave: विशेषज्ञों का अनुमान- अगस्त में दिखेगा कोरोना की तीसरी लहर का कहर, अक्टूबर में बढ़ेंगे मामले

उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने फॉलोवरों के साथ संवाद के दौरान यह भी कहा कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमपी) पिछले कुछ महीनों के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर जुटाए गए ‘स्ट्रेनों’ (वायरस का स्वरूप) का बड़े पैमाने पर अध्ययन करने में जुटा हुआ है. Also Read - Covid 19 In Kerala: केरल में कोरोना का कहर, पड़ोसी राज्यों ने सख्त किए यातायात नियम, अब वैक्सीन लगवाना अनिवार्य

उन्होंने कहा कि वायरस के स्वरूप में बदलाव (म्यूटेशन) के संबंध में शुरुआती अक्टूबर में जानकारी उपलब्ध होगी . ‘संडे संवाद’ मंच पर प्रश्नों का उत्तर देते हुए हर्षवर्द्धन ने कहा कि देश में ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है और स्वास्थ्य मंत्रालय स्थिति पर नजर रख रहा है . Also Read - क्या मध्य प्रदेश में तीसरी लहर दे रही दस्तक? राज्य में मिलने लगे नए केस, सरकार सतर्क

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक मंत्री ने यह भी कहा कि मंत्रालय ने खासकर ऑक्सीजन संबंधी व्यवस्था का मुद्दा सामने आने के बाद देश के ग्रामीण हिस्सों में ऑक्सीजन कंसंट्रेटर (विशेष चिकित्सा उपकरण) भेजे हैं.

कोविड-19 की लार संबंधी जांच के बारे में पूछे जाने पर हर्षवर्द्धन ने कहा कि आईसीएमआर ने कुछ टेस्ट को परखा है, लेकिन उन्हें भरोसेमंद नहीं पाया गया तथा अमेरिका के एफडीए से टेस्ट के संबंध में मंजूरी प्राप्त करने वाली कंपनियों ने भारत सरकार से अब तक संपर्क नहीं किया है.

उन्होंने कहा कि देश का शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान इस पद्धति के संबंध में और जानकारी जुटाने के लिए सक्रियता से काम कर रहा है और ठोस जानकारी मिलने पर सूचित किया जाएगा.

भारत में पोलियो उन्मूलन के भारत सरकार के अभियान के संबध में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि पोलियो के विपरीत कोरोना वायरस एक नया वायरस है और उस पर ज्यादा अनुसंधान अब तक नहीं हुआ है.