नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आधार और इससे संबंधित 2016 के कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुनवाई पूरी कर ली. इन याचिकाओं पर कोर्ट फैसला बाद में सुनाएगा. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने करीब चार महीने के दौरान 38 दिन इन याचिकाओं पर सुनवाई की. पीठ ने आज सभी संबंधित पक्षकारों को इस मामले में तत्काल अपनी लिखित दलीलें पेश करने का निर्देश दिया. Also Read - Corona Test Price: वापस मिलेंगे कोरोना जांच के पैसे? सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

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संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति ए के सिकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल हैं. इन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल और विभिन्न पक्षकारों की ओर से कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम , राकेश द्विवेदी , श्याम दीवान और अरविन्द दातार सरीखे वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी अपनी दलीलें पेश कीं. Also Read - किसान आन्दोलन: दिल्ली-नोएडा बॉर्डर से किसानों को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका

कोर्ट ने कहा, आदेश को गलत समझा

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने आधार नंबरों के साथ मोबाइल फोन जोड़ने के निर्णय का बचाव करते हुये कहा कि अगर मोबाइल उपभोक्ताओं का सत्यापन नहीं किया जाता तो उसे शीर्ष अदालत अवमानना के लिये जिम्मेदार ठहराती. हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि सरकार ने उसके आदेश की गलत व्याख्या की और उसने मोबाइल उपभोक्ताओं के लिये आधार को अनिवार्य बनाने के लिये इसे एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा-मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ने का कभी नहीं दिया निर्देश

कर्नाटक हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के एस पुत्तास्वामी और अन्य याचिकाकर्ताओं ने आधार की संवैधानिक वैधता को चुनौती दे रखी है. शीर्ष अदालत सरकार की इस दलील से सहमत नहीं थी कि लोकसभा अध्यक्ष ने आधार विधेयक को सही मायने में धन विधेयक बताया था क्योंकि यह समेकित कोष से मिलने वाले कोष से दी जा रही सब्सिडी से संबंधित है.

कई सेवाओं में आधार अनिवार्य

आधार नंबर को मोबाइल फोन के साथ जोड़ने को अनिवार्य करने से लेकर कई दूसरे मुद्दों पर  सुप्रीम कोर्ट में 38 याचिकाओं पर सुनवाई हुई. इसमें करीब 4 महीने लगे. बता दें कि आधार से कई तरह की सेवाओं को लिंक करना बाध्‍यकारी किया जा चुका है. आधार को पैन से और इंश्योरेंस पॉलिसी से लिंक करवाने को भी अनिवार्य कर दिया गया है.