नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने केरल के ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी से संबंधित मामले में मंगलवार सुनवाई शुरू कर दी. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने याचिकाकर्ताओं इंडियन लायर्स एसोसिएशन और अन्य के वकील से कहा कि वे तीन न्यायाधीश की पीठ द्वारा पिछले साल उसके पास भेजे गये सवालों तक ही अपनी दलीलें सीमित रखें. संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा शामिल हैं. Also Read - मध्य प्रदेशः युवती का गंभीर आरोप- '10 दिनों तक लॉकअप में रखकर 5 पुलिसकर्मी करते रहे रेप', जांच शुरू

संविधान पीठ याचिकाकर्ताओं के लिये समय सीमा निर्धारित करते हुये उनसे कहा कि वे इस अवधि के भीतर ही अपनी बहस पूरी करने का प्रयास करें. याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील आर पी गुप्ता ने बहस शुरू की और मंदिर के इतिहास का जिक्र किया. पीठ ने कहा, ‘‘आपको अनावश्यक बातों में जाने की जरूरत नहीं है और वकील को संविधान पीठ के पास भेजे गये मुद्दों तक सीमित रखना चाहिए.’’ इन याचिकाओं पर बुधवार से बहस होगी. Also Read - SC ने पराली जलाने पर रोक के लिए Retd Justice की अगुवाई में पैनल का गठन किया, SG ने विरोध किया

5 प्रश्न भेजे थे
शीर्ष अदालत ने पिछले साल 13 अक्तूबर को पांच प्रश्न तैयार करके संविधान पीठ के पास भेजे थे. इनमें यह सवाल भी था कि क्या मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध पक्षपात करने के समान है और इससे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 में प्रदत्त उनके मौलिक अधिकारों का हनन होता है और उन्हें अनुच्छेद 25 और 26 में प्रयुक्त ‘‘नैतिकता’’ से संरक्षण नहीं प्राप्त है. पत्थनमथिट्टा जिले के पश्चिमी घाट की पहाड़ी पर स्थित सबरीमाला मंदिर के प्रबंधन ने शीर्ष अदालत से पहले कहा था कि रजस्वला अवस्था की वजह से वे ‘‘शुद्धता’’ बनाये नहीं रख सकती है. इसलिए 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश मंदिर में वर्जित है. Also Read - HC ने छेड़छाड़ के आरोपी को युवती से राखी बंधवाने की शर्त पर दी थी बेल, SC ने जारी किया नोटिस

केरल सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था
इस मामले में सात नवंबर , 2016 को केरल सरकार ने न्यायालय को सूचित किया था कि वह ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के पक्ष में है. शुरूआत में राज्य की एलडीएफ सरकार ने 2007 में प्रगतिशील रूख अपनाते हुये मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की हिमायत की थी जिसे कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूडीएफ सरकार ने बदल दिया था. यूडीएफ सरकार का कहना था कि वह 10 से 50 आयु वर्ग की महिलाओं का प्रवेश वर्जित करने के पक्ष में है क्योंकि यह परपंरा अति प्राचीन काल से चली आ रही है.