नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में करीब साढ़े 4 माह पहले सुप्रीम कोर्ट के एसटी/एससी एक्ट पर आए फैसले के बाद व्यापक हिंसा हुई थी. इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर शीर्ष कोर्ट ने कहा कि भारत बंद के दौरान हुई हिंसा की घटनाओं की जांच का फैसला उचित पीठ करेगी. सुप्रीम कोर्ट नेे दायर जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा जिसमें आरोप लगाया गया कि अजा-अजजा कानून को कथित रूप से कमजोर करने के जन आक्रोश को राजनीतिक दलों तथा नेताओं ने उत्तेजित किया.

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (एससी-एससी) अत्याचार रोकथाम कानून को कमजोर करने का आरोप लगाया था ओर इसके विरोध में कुछ संगठनों के दो अप्रैल को आहूत‘भारत बंद’के दौरान हिंसा की घटनाएं हुई थीं. इस पर कुछ संगठनों ने सीबीआई से जांच कराने की मांग वाली याचिका दायर की थी. शीर्ष कोर्ट ने इसे सुनवाई के लिए ‘उचित पीठ’ के सामने सूचीबद्ध किया.

यह मामला जस्टिस एएम सप्रे और जस्टिस यूयू ललित की पीठ के सामने सुनवाई के लिए रखा गया, जिसने कहा कि इस पर शीर्ष अदालत की उचित पीठ द्वारा सुनवाई होगी. अदालत ने 16 मई को सामाजिक कार्यकर्ता बेजोन कुमार मिश्रा द्वारा दायर जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा जिसमें आरोप लगाया गया कि अजा-अजजा कानून को कथित रूप से कमजोर करने के जन आक्रोश को राजनीतिक दलों तथा नेताओं ने उत्तेजित किया.

अधिवक्ताओं शशांक देव सुधी और शशि भूषण द्वारा दायर याचिका में राजनीतिक दलों और नेताओं से प्रदर्शन में सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान और क्षति के लिए हर्जाना वसूलने का निर्देश देने की मांग की गई. बंद के दौरान देशभर में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी, जिसमें 11 लोगों की जान गई थी और कई संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था.