नई दिल्ली। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश और गोवा सहित छह राज्यों के कुछ इलाकों में अगले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की है. विभाग की ओर से प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश के दक्षिण पश्चिमी इलाकों और सीमावर्ती गुजरात और उत्तरी मध्य महाराष्ट्र के ऊपर हवा के कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण इन राज्यों में भारी बारिश की आशंका व्यक्त की गई है. Also Read - मध्य प्रदेश के इंदौर, रीवा एवं उज्जैन संभागों में भारी बारिश की चेतावनी

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इसकी वजह से उत्तरी कोंकण, मध्य महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात के कच्छ एवं सौराष्ट्र क्षेत्र, तेलंगाना और उत्तरी कर्नाटक के भीतरी इलाकों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी जारी की गई है. इसके अलावा राजस्थान के दक्षिण पूर्वी इलाकों और मध्य प्रदेश के दक्षिण पश्चिम इलाकों में अधिकांश स्थानों पर अगले 24 घंटों तक जोरदार बारिश की संभावना को देखते हुए भारी बारिश जनित सभी संभावित स्थितियों से निपटने की चेतावनी दी गई है. Also Read - दिल्‍ली में लगातार तीसरे दिन भी सुबह-सुबह हुई बारिश, तय समय से पहले आ रहा मानसून

केरल में जल प्रलय, अबतक 79 की मौत, बाढ़ से जुड़ी 10 बड़ी बातें

देश में मानसून की बारिश का असर अब भी बरकरार है. केरल में भारी बारिश से हालात बिगड़े हुए हैं. केरल में भयावह हालात हैं और अभी तक यहां बचाव और राहत कार्य चल रहा है. अब तक करीब 173 लोगों की मौत हो चुकी है और कई मकान जमीदोंज हो चुके हैं. बारिश से कई इलाके जलमग्न हैं और हजारों लोगों को दूसरी जगहों पर शिफ्ट किया गया है. वहीं, गुजरात के पंचमहल में कई इलाके जलमग्न हैं. कर्नाटक में भी हालात सही नहीं हैं और सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया है.

ये कोच्ची का एनार्कुलम इलाका है जो पूरी तरह पानी में डूबा हुआ है.

केरल में बिगड़े हालात

केरल में बारिश की घटनाओं में गुरुवार को महज एक दिन में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई. वहीं राज्य में आज अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी और पेट्रोल पंप में ईंधन की कमी से संकट गहराता दिखा. करीब एक सदी में आई इस प्रलयंकारी बाढ़ में आठ अगस्त के बाद से अब तक 173 लोगों की मौत हो गई है. आपदा ने इस प्राकृतिक छटा वाले राज्य को झकझोर कर रख दिया है. इसके चलते इसका पर्यटन उद्योग बर्बाद हो गया है, हजारों हेक्टेयर भूभाग में उपजी फसलें तबाह हो गई हैं और बुनियादी ढांचे को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है.

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) कर्मियों के अलावा सेना, नौसेना, वायुसेना के कर्मियों ने बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित इलाकों में अपने-अपने घरों की छतों, ऊंचे स्थानों पर फंसे लोगों को निकालने का बड़ा कार्य शुरू किया. ऊंचाई वाले इलाकों में पहाड़ों के दरकने के कारण चट्टानों के टूटकर नीचे सड़क पर गिरने से सड़कें अवरुद्ध हो गईं जिससे वहां रहने वालों और गांवों में बचे लोगों का संपर्क बाकी की दुनिया से कट गया. ये गांव आज किसी द्वीप में तब्दील हो गए हैं. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों समेत सैकड़ों लोग ऐसी जगहों पर फंसे हैं जहां नौका से पहुंच पाना मुश्किल है. उन लोगों को रक्षा मंत्रालय के हेलीकॉप्टर की मदद से निकाला गया और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया.