Heeng Cultivation In India: हींग यानी Asafoetida अधिकतर भारतीय किचन का अभिन्न हिस्सा है. हींग एक प्रकार की जड़ी-बूटी है जो हिमालय के पहाड़ों में एक पौधे से पाई जाती है. इसमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. लेकिन अब वैज्ञानिक इस प्राकृतिक चीज को कृत्रिम खेती करने का प्रयोग कर रहे हैं. Also Read - ई-कॉमर्स वेबसाइट से ICAR के अधिकारी ने मंगवाया था फोन, डिब्बा खोला और फिर...

इस बारे में इंडियन एक्सप्रेस में एक रिपोर्ट छपी है. इस रिपोर्ट के मुताबिक CSIR-Institute of Himalayan Bioresource, Palampur (IHBT) ने एक मिशन के तहत भारत के हिमालयी क्षेत्र में इसकी खेती कर रहे हैं. हींग के पहले पौधे को हिमाचल प्रदेश के लाहौल घाटी के क्वारिंग गांव में लगाया गया है. Also Read - ICAR NET 2019 के परीक्षा की तिथि में हुआ बदलाव, यहां देखें फुल डिटेल

गौरतलब है कि भारत के करीब-करीब हर किचन में हींग का इस्तेमाल होता है. भारतीय खाने में इसका भरपूर इस्तेमाल होता है. एक अनुमान के मुताबिक भारत हर साल करीब 600 करोड़ रुपये की हींग का आयात करता है. Also Read - 40 साल से पेड़ पर चढ़कर रिसर्च कर रही हैं नलिनी, हड्डियां टूटने के बाद भी बना हुआ है हौसला

दरअसल हींग पहाड़ों के बीच पाए जाने वाले एक पौधे से निकली चिपचिपा चीज है. पहाड़ों पर रहने वाले लोग इसे इकट्ठा कर हमारे किचन तक पहुंचाते हैं.

ईरान और अफगानिस्तान की पहाड़ियों के बीच सबसे ज्यादा हींग पाई जाती है. यहां पहाड़ी इलाकों में हींग का पौधा पाया जाता है.

जहां तक भारत की बात है तो यहां पर हींग की खेती नहीं होती. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत हर साल करीब 1200 टन कच्चे हींग का आयात करता है. यह मुख्य रूप से ईरान, अफगानिस्तान और उजबेकिस्तान से आता है.

इंडियन एक्सप्रेस ने आईसीएआर के हवाले से लिखा है कि 1963 से 1989 के बीच भारत ने एक बार हींग की खेती करने की कोशिश की थी. लेकिन इसके बारे में कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है.

2017 से एक बार फिर हींग की खेती करने का प्रस्ताव आया. इसके बीच ईरान से आयात किए गए और इसे NBPGR की देखरेख में रखा गया है.

इसके बाद भारतीय कृषि शोध परिषद (ICAR) से मंजूरी मिलने के बाद इस बीज को बोया गया है. इस बारे में 2018 से ही शोध के कार्य चल रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि हींग के पौधे को उगाने में अभी कई चुनौतियां आ रही हैं. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बीज से अंकुरित होने की दर केवल एक फीसदी है. यानी 100 बीज होने पर उसमें से केवल एक के पौधा के रूप में तब्दील होने की रिपोर्ट है.