नई दिल्ली| जम्मू-कश्मीर के त्राल में सुरक्षा बलों ने 27 मई को आतंकवादियों के साथ हुई मुठभेड़ में हिज़्बुल कमांडर सबज़ार अहमद को मार गिराया. इस मुठभेड़ को आम लोगों ने कश्मीर में आए दिन होने वाली मुठभेड़ की तरह देखा, लेकिन ये कार्रवाई कश्मीर में ‘स्थायी समाधान’ के लिए बनाई गई बड़ी रणनीति का हिस्सा थी. इसके ठीक सात दिन बाद एनआईए ने श्रीनगर और दिल्ली में हुर्रियत नेताओं और उनके करीबियों के घर-दफ्तर पर छापे मारे. एनआईए मे इस मामले में जो एफआईआर लिखी, वो इतनी बारीकी से लिखी गई कि उसमें कोई छिपी रणनीति उजागर न हो सके.

एनआईए की चार पेज की रिपोर्ट में लिखा है, “हुर्रियत लश्कर और हिजबुल के साथ सहयोग कर रहा था. ये हवाला लेनदेन के ज़रिये पैसों का इंतेजाम करके घाटी में बंदूक लूटने वाले उग्रवादियों और पत्थरबाज़ों की मदद कर रहा है.” सीएनएन-न्यूज़ 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सबज़ार को मार गिराना और एनआईए की छापेमारी, ये दोनों घटनाएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं. ये कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘थ्री पॉइंट कश्मीर प्लान’ का हिस्सा है.

कुछ दिनों पहले ही गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था, “हम कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए एक स्थायी समाधान तक पहुंचे हैं. शुरुआत हो गई है और हम आगे बढ़ रहे हैं.”

उग्रवादियों और आतंकवादियों पर नजर

सीएनएन-न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, घाटी में सक्रिय आतंकवादियों और उग्रवादियों की एक लिस्ट तैयार की गई है, और बारी-बारी से उनको निशाना बनाया जा रहा है. सबज़ार इसी लिस्ट का हिस्सा था. कश्मीर में अब लगभग हर दिन बंदूक और गोलाबारी का इस्तेमाल हो रहा है. 15 साल बाद, फिर से सर्च ऑपरेशन चल रहे हैं. उग्रवादियों और बाहरी आतंकवादियों के बीच का अंतर अब नहीं रह गया है. सुरक्षाबल पाक की सुरक्षा चौकियों पर हमला करके उसका वीडियो जारी कर रही हैं.

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अलगाववादी और हवाला का पैसा

ऐसे अलगाववादी जो हवाला के ज़रिये पैसे इकट्ठा कर रहे हैं और आतंकवादी गतिविधियों को मदद पहुंचा रहे हैं, केंद्र सरकार के निशाने पर हैं. माना जा रहा है कि 200-300 करोड़ रुपये इनके पास हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, हवाला लेनदेन में शामिल ऐसे ही अलगाववादियों की लिस्ट दो महीने पहले तैयार कर ली गई थी. इस मामले में सरकार ने एनआईए के लिए रास्ता भी साफ कर दिया है.

घाटी और इंटरनेट

कश्मीर में सरकार की एक मुसीबत इंटरनेट भी है. घाटी में ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी जान जोशिम में डालकर वीडियो और तस्वीर लेते हैं उन्हें सोशल मीडिया पर डाल देते हैं. इस दौरान कई लोगों की मौत भी हो जाती है. इसी समस्या को सुलझाने के लिए घाटी को इंटरनेट और सोशल मीडिया से अलग किया गया, जिसके नतीजे सामने आ गए. सबज़ार के अंतिम संस्कार में सिर्फ तीन हज़ार लोग ही पहुंचे. बुरहान के अंतिम संस्कार में इससे कई गुना ज्यादा लोग आए थे, और हिंसा पैदा हो गई थी.

सूत्रों के मुताबिक, मोदी सरकार का ‘थ्री पॉइंट कश्मीर प्लान’ यही है. इन तीनों स्तर पर अपनी लड़ाई जारी रखकर सरकार कश्मीर का समाधान करने की कोशिश कर रही है.