नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने इस बात को अस्वीकार्य बताया है कि पुलिस द्वारा इस्तेमाल किये जा रहे चेहरे से पहचान वाले सॉफ्टवेयर से किसी लापता बच्चे के मामले को सुलझाने में मदद नहीं मिली. दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी में बीते तीन वर्ष में लापता पांच हजार से अधिक बच्चों का पता नहीं चल पाया है. न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी की पीठ ने कहा कि तीन साल में दिल्ली से इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का लापता होना गंभीर चिंता का विषय है.

पीठ ने इस बात को बेहद अस्वीकार्य बताया कि दिल्ली पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे चेहरे से पहचान वाले सॉफ्टवेयर (एफआरएस) से कोई लाभ नहीं हुआ क्योंकि इससे किसी लापता बच्चे के मामले को सुलझाने में मदद नहीं मिली.

अदालत ये टिप्पणियां एक व्यक्ति की उस याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें जुलाई 2014 से लापता उसकी नाबालिग बेटी को खोजने के लिए पुलिस को निर्देश देने की मांग की गई थी. इस मामले में आगे की सुनवाई 25 फरवरी को होगी.