नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने योग गुरु रामदेव को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने रामदेेेव पर लिखी गई एक किताब की बिक्री और प्रकाशन पर रोक लगा दी है, जिसमें दावा किया गया है कि इसमें मानहानिजनक सामग्री है. बता दें कि किताब”गॉडमैन टू टायकून’  पर रामदेव की याचिका पर अदालत का यह फैसला आया है. याचिका में कहा गया है कि यह किताब रामदेव के जीवन पर है, जिसमें अपमानजनक सामग्री है और इससे उनके आर्थिक हित के साथ ही उनकी छवि को नुकसान होगा. Also Read - हरिद्वार: रामदेव के प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में आग, करोड़ों का नुकसान

न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने कहा कि किसी व्यक्ति के बोलने एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की कीमत पर किसी अन्य व्यक्ति के सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार को सूली पर नहीं चढ़ाया जा सकता. Also Read - हाईकोर्ट ने दिल्ली हिंसा पर कहा- एक और '84' नहीं होने देंगे, तीन BJP नेताओं के ख़िलाफ़ FIR दर्ज हो

सम्मानजनक जीवन बनाम अभिव्यक्ति 
अदालत ने कहा, ”भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति के सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार को किसी अन्य व्यक्ति के वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की कीमत पर सूली पर नहीं चढ़ाया जा सकता है….” Also Read - गार्गी कॉलेज छेड़छाड़ केस: दिल्‍ली HC ने जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र और CBI से मांगा जवाब

बाबा के खिलाफ आक्षेप
हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों को संतुलित करना होगा, ताकि किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचे और पहले चूंकि इसी मुद्दे पर किताब प्रकाशित हो चुकी है, लेकिन इसे फिर से प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि प्रथमदृष्ट्या इसमें उनके खिलाफ आक्षेप हैं.

ऑनलाइन बिक्री पर रोक
अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश ने पिछले वर्ष अगस्त में प्रकाशक जगरनॉट बुक्स को अगले आदेश तक किताब के प्रकाशन और बिक्री पर रोक लगा दी थी. इसने अमेजन इंडिया और फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राईवेट लिमिटेड को किताबों की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगा दी थी.

निचली कोर्ट ने हटाया था प्रतिबंध
बहरहाल इस साल 28 अप्रैल को निचली कोर्ट अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश ने प्रतिबंध हटा दिया था. पत्रकार प्रियंका पाठक नारायण ने यह किताब लिखी है.

निचली कोर्ट के फैसले को चुनौती
रामदेव ने निचली अदालत के फैसले को दरकिनार करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने किताब के प्रकाशन और बिक्री पर प्रतिबंध हटाने के आदेश दिए थे.

जीवित व्यक्ति सम्मानजनक व्यवहार का हकदार
हाई कोर्ट ने किताब के प्रकाशन पर रोक लगाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के बारे में किताब लिखी गई है, वह जीवित व्यक्ति है जो सम्मानजनक व्यवहार का हकदार है.