नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने योग गुरु रामदेव को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने रामदेेेव पर लिखी गई एक किताब की बिक्री और प्रकाशन पर रोक लगा दी है, जिसमें दावा किया गया है कि इसमें मानहानिजनक सामग्री है. बता दें कि किताब”गॉडमैन टू टायकून’  पर रामदेव की याचिका पर अदालत का यह फैसला आया है. याचिका में कहा गया है कि यह किताब रामदेव के जीवन पर है, जिसमें अपमानजनक सामग्री है और इससे उनके आर्थिक हित के साथ ही उनकी छवि को नुकसान होगा. Also Read - Delhi Night Curfew Latest News: दिल्‍ली सरकार 3-4 दिन में रात के कर्फ्यू पर लेगी फैसला

न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने कहा कि किसी व्यक्ति के बोलने एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की कीमत पर किसी अन्य व्यक्ति के सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार को सूली पर नहीं चढ़ाया जा सकता. Also Read - Video: योगगुरु बाबा रामदेव हाथी की पीठ पर योग करते हुए अचानक नीचे गिरे

सम्मानजनक जीवन बनाम अभिव्यक्ति 
अदालत ने कहा, ”भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति के सम्मानजनक जीवन जीने के अधिकार को किसी अन्य व्यक्ति के वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की कीमत पर सूली पर नहीं चढ़ाया जा सकता है….” Also Read - Coronavirus Medicine Coronil: सुप्रीम कोर्ट से पतंजलि को मिली बड़ी राहत, दवा को लेकर कही ये बात

बाबा के खिलाफ आक्षेप
हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों को संतुलित करना होगा, ताकि किसी व्यक्ति के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचे और पहले चूंकि इसी मुद्दे पर किताब प्रकाशित हो चुकी है, लेकिन इसे फिर से प्रकाशित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, क्योंकि प्रथमदृष्ट्या इसमें उनके खिलाफ आक्षेप हैं.

ऑनलाइन बिक्री पर रोक
अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश ने पिछले वर्ष अगस्त में प्रकाशक जगरनॉट बुक्स को अगले आदेश तक किताब के प्रकाशन और बिक्री पर रोक लगा दी थी. इसने अमेजन इंडिया और फ्लिपकार्ट इंटरनेट प्राईवेट लिमिटेड को किताबों की ऑनलाइन बिक्री पर भी रोक लगा दी थी.

निचली कोर्ट ने हटाया था प्रतिबंध
बहरहाल इस साल 28 अप्रैल को निचली कोर्ट अतिरिक्त वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश ने प्रतिबंध हटा दिया था. पत्रकार प्रियंका पाठक नारायण ने यह किताब लिखी है.

निचली कोर्ट के फैसले को चुनौती
रामदेव ने निचली अदालत के फैसले को दरकिनार करने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसने किताब के प्रकाशन और बिक्री पर प्रतिबंध हटाने के आदेश दिए थे.

जीवित व्यक्ति सम्मानजनक व्यवहार का हकदार
हाई कोर्ट ने किताब के प्रकाशन पर रोक लगाते हुए कहा कि जिस व्यक्ति के बारे में किताब लिखी गई है, वह जीवित व्यक्ति है जो सम्मानजनक व्यवहार का हकदार है.