नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल ने घोषणा की थी कि दिल्ली में जो भी गरीब किराएदार हैं और किराये के घर या कमरे का किराया देने में असमर्थ हैं, दिल्ली सरकार उनका किराया भरेगी. कोरोना के चलते लिए गए इस फैसले पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की घोषणा पर अमल के लिए नीति बनाने के वास्ते आम आदमी पार्टी (आप) सरकार को दिये गये निर्देश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी.Also Read - Delhi CM अरविंद केजरीवाल राम लला के दर्शन के लिए जाएंगे अयोध्‍या

मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ दिल्ली सरकार की अपील पर नोटिस जारी किया. पीठ ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 29 नवंबर तय की. याचिकाकर्ताओं – दैनिक वेतन भोगी और श्रमिकों को नोटिस जारी किया गया था – जिनकी याचिका पर एकल न्यायाधीश ने आदेश पारित किया था, जिसे दिल्ली सरकार ने चुनौती दी है. Also Read - Delhi Corona Update: दिल्ली में बीते 24 घंटे में कोरोना के 25 नए केस, आज नहीं गई किसी की जान; एक्टिव मामले 300 के करीब

एकल पीठ ने कहा था कि अगर स्थगन का आदेश पारित नहीं किया गया तो अपीलकर्ता को अपूरणीय क्षति होगी. इस पीठ ने यह भी कहा था कि नागरिकों से किया गया मुख्यमंत्री का वादा लागू करने योग्य है. पीठ ने कहा, ‘‘प्रथमदृष्टया मामला अपीलकर्ता के पक्ष में है. हम सुनवाई की अगली तारीख तक एकल न्यायाधीश के आदेश के संचालन, कार्यान्वयन और निष्पादन पर रोक लगाते हैं.’’ Also Read - Delhi Corona Update: दिल्ली में बीते 24 घंटे में कोरोना के 36 नए मामले और एक की मौत

दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनीष वशिष्ठ ने दावा किया कि महामारी के प्रकोप की पृष्ठभूमि में, मुख्यमंत्री द्वारा बड़े पैमाने पर जनता से ‘‘अपील’’ की गई थी कि वे किराएदारों को किराए का भुगतान करने के लिए मजबूर नहीं करें. उन्होंने कहा, ‘‘मेरे हिसाब से तो यह कोई वादा ही नहीं था. हमने सिर्फ इतना कहा कि कृपया प्रधानमंत्री के बयान का पालन करें. हमने मकान मालिकों से कहा (कि) किराएदारों को किराया देने के लिए मजबूर न करें..और अगर कुछ हद तक, गरीब लोग भुगतान नहीं कर पाते हैं, तो सरकार इस पर गौर करेगी.’’

पीठ ने उनकी बात पर गौर करते हुए कहा, ‘‘तो आपका भुगतान करने का कोई इरादा नहीं है? यहां तक कि पांच फीसदी भुगतान भी.” वरिष्ठ वकील ने इस पर जवाब दिया कि ‘‘केवल तभी जब स्थिति की मांग हो.’’ याचिकाकर्ताओं दिहाड़ी मजदूरों और श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील गौरव जैन ने किसी भी तरह के स्थगन का विरोध किया. उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किलों के पास किराए की राशि का भुगतान करने का कोई साधन नहीं है.

गौरतलब है कि इस साल 22 जुलाई को, न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह ने फैसला सुनाया था कि नागरिकों के लिए एक मुख्यमंत्री का वादा लागू करने योग्य था और आप सरकार को छह सप्ताह के भीतर अरविंद केजरीवाल की इस घोषणा पर फैसला करने का निर्देश दिया था कि सरकार उन गरीब किरायेदारों की ओर से किराए का भुगतान करेगी, जो कोविड-19 के कारण ऐसा करने में असमर्थ हैं.