नई दिल्ली : कांग्रेस और जद ( स ) गठबंधन का कर्नाटक में सत्ता पाने और भाजपा को रोकने के लिए राजधानी दिल्ली में बुधवार को रात भर उच्चतम न्यायालय में कानूनी संघर्ष चलता रहा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने येदुरप्पा के पद ग्रहण करने और उनके मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ दिलाए जाने से रोके जाने की कांग्रेस और जद (एस ) की मांग ठुकरा दी. गुरूवार को येदुरप्पा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण की, और राज्यपाल ने उन्हें 15 दिन के अंदर बहुमत साबित करने का समय भी दिया. लेकिन बुधवार की रात चले इस हाई वोल्टेज ड्रामे की स्थिति यह थी कि उच्चतम न्यायालय में आधी रात को हो रही दुर्लभतम सुनवाई की कवरेज के लिए मीडिया की फौज बुधवार देर रात से गुरूवार भोर होने तक वहीं डटी रही. Also Read - Coronavirus: देश में कोरोना वायरस से पहली मौत! अब तक 60 लोग संक्रमित

क्या और कैसे हुआ सब ?
कर्नाटक का सत्ता संघर्ष बेंगलुरू से दिल्ली पहुंचने और राज्यपाल के निर्णय को चुनौती देने और उससे राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाने की संभावना बुधवार देर शाम साफ होने लगी थी.
कुमारस्वामी के नेतृत्व वाले जद ( स ) और कांग्रेस गठबंधन द्वारा रात में ही राज्यपाल के फैसले को चुनौती देने की संभावना जैसे ही बढ़ी शीर्ष अदालत और प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के निवास के बाहर मीडिया का जमावड़ा शुरू हो गया था. दोनों ही स्थानों पर विभिन्न चैलनों की ओबी वैन और मीडियाकर्मियों के दलबल प्रतिपल कोई न कोई नई जानकारी पाने के लिये बेचैन थे. Also Read - आयकर विभाग का दावा- कैफे कॉफी डे के मालिक सिद्धार्थ रखते थे ब्‍लैकमनी, किया था स्वीकार

मीडियाकर्मी नए घटनाक्रम की जानकारी के लिये प्रधान न्यायाधीश के निवास पर अपने अपने सूत्रों से संपर्क कर रहे थे. इसी बीच खबर मिली कि उच्चतम न्यायालय देर रात पौने दो बजे इस मामले में सुनवाई करेगा. यह खबर मिलते ही प्रधान न्यायाधीश के निवास के बाहर एकत्र मीडियाकर्मियों का जमावड़ा चंद मिनटों में ही खत्म हो गया. अब मीडियाकर्मियों, प्रेस फोटोग्राफरों और चैनलों की ओबी वैन के लिये उच्चतम न्यायालय परिसर के बाहर एकत्र होने की बारी थी. न्यायालय परिसर में गतिविधियां तेज थीं और सुरक्षाकर्मी भी मुस्तैद थे. न्यायमूर्ति ए के सिकरी के न्यायालय कक्ष में मुकदमे की सुनवाई के लिये सिर्फ उन्हीं पत्रकारों को प्रवेश की अनुमति दी गई जिनके पास शीर्ष अदालत द्वारा जारी प्रवेश पत्र थे. Also Read - कर्नाटक: बसपा सुप्रीमो मायावती का हमला, कांग्रेस की गलती से भाजपा को मिलीं 104 सीटें

मुकदमे की सुनवाई के बारे में क्षण क्षण की जानकारी जानने के उत्सुक मीडियाकर्मी न्यायमूर्ति सिकरी के न्यायालय से बाहर निकलने वाले वकीलों को घेर रहे थे. शीर्ष अदालत के द्वार पर वरिष्ठ अधिवक्ता डा अभिषेक मनु सिंघवी के पहुंचते ही संवाददाताओं ने ताजा जानकारी प्राप्त करने के लिये उन्हें घेर लिया। परंतु जद ( स ) कांग्रेस की ओर से बहस करने वाले अभिषेक सिंघवी ने कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया. हालांकि, चंद क्षणों बाद ही वह पीछे मुड़े और प्रेस फोटोग्राफरों को मुस्कुराते हुये विजयी होने का संकेत दिया. इसके साथ ही कैमरों के फ्लैश चमकने लगे.

इसके थोड़ी देर बाद ही अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल, अतिरिक्त सालिसीटर जनरल मनिन्दर सिंह और तुषार मेहता , पूर्व अटानी जनरल मुकुल रोहतगी के साथ ही कई अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता और दूसरे वकीलों के दल ने न्यायालय परिसर में प्रवेश किया। एक बार फिर कैमरे के फ्लैश चमके. देर रात दो बजे न्यायमूर्ति ए के सिकरी, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की विशेष खंडपीठ ने सुनवाई शु्रू की और साथ ही मीडियाकर्मी अपनी-अपनी खबरें भेजने और सुनवाई के संभावित नतीजों को लेकर चर्चा करने में व्यस्त हो गये. न्यायालय की कार्यवाही खत्म होने के साथ ही स्ट्रीट लाइट बुझ गयीं और वकीलों का बाहर आना शुरू हो गया. इसके साथ ही मीडियाकर्मियों और खबरिया चैनलों में वकीलों की प्रतिक्रिया और टिप्पणी प्राप्त करने की होड़ लग गयी परंतु उन्हें इसमें विशेष सफलता नहीं मिली.
( एजेंसी )