शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के एक विशेष सत्र के दौरान शनिवार को राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक सर्वसम्मति से पारित किया गया. वित्त मंत्रालय का भी प्रभार रखने वाले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने सदन में विधेयक पेश किया, जिसका भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने समर्थन किया. राज्य में भाजपा मुख्य विपक्षी पार्टी है. Also Read - Sunny Deol Tests Positive For COVID-19: कोरोना वायरस से संक्रमित हुए सनी देओल

विधेयक सत्र के दूसरे दिन एक घंटे तक चली चर्चा के बाद पारित कर दिया गया. इसके बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी राज्य के साथ ही देश में अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को सरल और सुसंगत करेगी. Also Read - इस राज्य की सरकार का बड़ा फैसला, अब सिर्फ 5 दिन काम करेंगे सरकारी कर्मचारी

उम्मीद जताई जा रही है कि जीएसटी अर्थव्यवस्था में उत्पादन की लागत और महंगाई कम करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभाएगा, जिसके चलते व्यापार और उद्योग घरेलू के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे. Also Read - काम की खबरः बीमा पॉलिसी खरीदने के लिए दी गई प्रीमियम पर मिलेगी LTC कैश वाउचर योजना के तहत छूट

मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग/यूपीए) सरकार जीएसटी विधेयक लाई थी.

विपक्ष के नेता और राज्य के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके भाजपा नेता प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि जीएसटी उपभोक्ताओं के अनुकूल अधिनियम है और स्वतंत्र भारत में अब तक का सबसे बड़ा कर सुधार है.

उन्होंने कहा कि गेहूं और चावल जैसे मुख्य खाद्य पदार्थो को जीएसटी के दायरे से अलग रखा गया है, जिससे आम आदमी को सहूलियत होगी.