नई दिल्लीः हिन्दी की समकालीन कविता और आलोचना के सशक्त हस्ताक्षर और अज्ञेय के तीसरा तार सप्तक के प्रमुख कवि डॉ. केदारनाथ सिंह का सोमवार को दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. पारिवारिक सूत्रों ने बताया कि डॉ. केदारनाथ सिंह को करीब डेढ़ माह पहले कोलकाता में निमोनिया हो गया था. इसके बाद से वह बीमार चल रहे थे. उनका आज रात करीब साढ़े आठ बजे एम्स में निधन हो गया. वह 84 वर्ष के थे. उनके परिवार में एक बेटा और पांच बेटियां हैं. Also Read - Kerala Plane Crash: केरल विमान हादसे में मरने वालों की संख्या 17 हुई, एएआईबी मामले की करेगी जांच

उन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार और व्यास सम्मान सहित कई सम्मानों से पुरस्कृत किया गया था. उनके प्रमुख कविता संग्रहों में ‘अभी बिलकुल अभी, जमीन पक रही है, यहां से देखो, बाघ, अकाल में सारस और उत्तर कबीर’ शामिल हैं. आलोचना संग्रहों में ‘कल्पना और छायावाद, मेरे समय के शब्द’ प्रमुख हैं. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी करने के बाद, जेएनयू में उन्होंने अध्यापन का काम किया. जेएनयू के हिंदी विभाग के अध्यक्ष पद से वो रिटायर हुए. मंगलवार दोपहर तीन बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. Also Read - Aaj Ka Panchang 8 August 2020: आज कृष्ण पक्ष पंचमी देखें पंचांग, शुभ-अशुभ समय, राहुकाल

डॉ. केदारनाथ सिंह की कविता शहर में रात Also Read - England vs Pakistan 1st Test Day 3 : इंग्लैंड को 219 रन पर ढेर करने के बाद पाक की दूसरी पारी लड़खड़ाई

बिजली चमकी, पानी गिरने का डर है
वे क्यों भागे जाते हैं जिनके घर है
वे क्यों चुप हैं जिनको आती है भाषा
वह क्या है जो दिखता है धुँआ-धुआँ-सा
वह क्या है हरा-हरा-सा जिसके आगे
हैं उलझ गए जीने के सारे धागे
यह शहर कि जिसमें रहती है इच्छाएँ
कुत्ते भुनगे आदमी गिलहरी गाएँ
यह शहर कि जिसकी ज़िद है सीधी-सादी
ज्यादा-से-ज्यादा सुख सुविधा आज़ादी
तुम कभी देखना इसे सुलगते क्षण में
यह अलग-अलग दिखता है हर दर्पण में
साथियों, रात आई, अब मैं जाता हूँ
इस आने-जाने का वेतन पाता हूँ
जब आँख लगे तो सुनना धीरे-धीरे
किस तरह रात-भर बजती हैं ज़ंजीरें

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में 1932 में जन्मे केदारनाथ सिंह नई कविता के अग्रणी कवियों में शुमार थे. केदारनाथ सिंह हिंदी कविता में नए बिंबों के प्रयोग के लिए जाने जाते हैं. उनकी कविताएं जटिल विषयों को सहज एवं सरल भाषा में व्यक्त करती हैं. केदारनाथ सिंह अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि हैं.  केदारनाथ सिंह ने कविता, आलोचना करने के साथ-साथ कई पुस्तकों का संपादन भी किया है.

साल 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मशहूर हिंदी कवि केदारनाथ सिंह को भारतीय साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया.इस अवसर पर उन्होंने कहा था, ‘केदारनाथ सिंह ने अपनी कविताओं के माध्यम से हमें अनुप्रास एवं काव्यात्मक गीत की दुर्लभ संगति दी है और उन्होंने वास्तविकता एवं गल्प को समानता के साथ समाहित किया है, उनकी कविताओं से अर्थ, रंग एवं स्वीकार्यता झलकती है.’ मुखर्जी ने कहा था, ‘अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी कवि न केवल आधुनिक कला सौंदर्य के प्रति संवेदनशील हैं बल्कि पारंपरिक ग्रामीण समुदायों के प्रति भी उनकी संवेदना झलकती है.’