'मथुरा-काशी में मंदिरों को तोड़कर बनाई मस्जिदें, सर्वे-कोर्ट की क्या जरूरत?', बोले इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब

यूपी के वाराणसी में स्थित ज्ञानवापी परिसर में हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति मिलने के बाद मंदिर-मस्जिद का मुद्दा एक बार फिर से चर्चा में है. जिसपर अब इरफान हबीब ने बड़ा बयान दिया है.

Published date india.com Updated: February 8, 2024 1:44 PM IST
'मथुरा-काशी में मंदिरों को तोड़कर बनाई मस्जिदें, सर्वे-कोर्ट की क्या जरूरत?', बोले इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब

Irfan Habib On Temples: ज्ञानवापी परिसर के तहखाने में पूजा के बाद मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला भी चर्चा में है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बुधवार को अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा का जिक्र करते हुए काशी और मथुरा में मंदिर-मस्जिद विवाद की तरफ इशारा किया था. इस मामले पर अब प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने भी बड़ा बयान दिया है.

प्रो. इरफान हबीब ने कहा, ‘मथुरा और काशी में 300 वर्ष पहले मंदिर थे उन्हें तोड़ा गया है. इन्हें तोड़ा गया यह बात बिल्कुल सही है. इसका जिक्र इतिहास की कई किताबों में किया गया है. यह साबित करने के लिए किसी सर्वे, कोर्ट-कचहरी की कोई जरूरत नहीं.’

सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया जिक्र

इससे पहले बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, ‘अयोध्या का मुद्दा जब लोगों ने देखा तो नंदी बाबा ने भी इंतजार किए बगैर रात में बैरिकेड तोड़वा डाले और अब हमारे कृष्ण कन्हैया भी कहां मानने वाले हैं.’

‘पांडवों ने सिर्फ पांच गांव मांगे थे’

मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, ‘पांडवों ने कौरवों से सिर्फ पांच गांव मांगे थे लेकिन सैकड़ों वर्षों से यहां की आस्था केवल तीन (अयोध्या, काशी और मथुरा) के लिए बात कर रही है.’

‘अयोध्या के साथ अन्याय होता रहा’

योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा में भाग लेते हुए अपने सम्बोधन में कहा, ‘सदियों तक अयोध्या कुत्सित मंशा के लिए अभिशप्त थी और वह एक सुनियोजित तिरस्कार भी झेलती रही. लोक आस्था और जन भावनाओं के साथ ऐसा खिलवाड़ संभवत: दूसरी जगह देखने को नहीं मिला होगा. अयोध्या के साथ अन्याय हुआ.’

मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिये बगैर कहा, ‘जब मैं अन्याय की बात करता हूं तो हमें पांच हजार वर्ष पुरानी बात भी याद आने लगती है. उस समय पांडवों के साथ भी अन्याय हुआ था. उस समय कृष्ण कौरवों के पास गये थे और कहा था कि बस दे दो केवल पांच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम. लेकिन दुर्योधन वह भी दे ना सका.’

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