नई दिल्ली. अंग्रेजों की अधीनता न मानने वाले गुजरात के डांग के पूर्व राजाओं को इस साल भी उनकी वार्षिक पेंशन सरकार ने दे दी है. होली के अवसर पर सजने वाले ऐतिहासिक सालाना डांग दरबार में रविवार को गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली ने आदिवासी राजा और उनके भाई-बंधुओं को 21 लाख रुपए से ज्यादा की ‘सालियाना’ (पेंशन) सौंपी. आहवा स्थित रंग उपवन में इस अवसर पर आयोजित चार दिवसीय कार्यक्रम का राज्यपाल ने उद्घाटन किया. इस दौरान राज्यपाल ने डांग के पूर्व राजाओं को विशेष स्मृतिचिह्न भी भेंट किया. वहीं डांग राजाओं ने प्रजा की ओर से राज्यपाल को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया. कार्यक्रम के उद्घाटन से पहले परंपरा के अनुसार राजाओं की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें सजी-धजी बग्घी में सवार पूर्व राजाओं ने नगर भ्रमण किया. इसके बाद आदिवासी लोक संस्कृति की झलक भी दिखाई गई.

डांग दरबार के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली ने कहा कि राजा-महाराजाओं की मातृभूमि के प्रति अप्रतिम देशभक्ति और डांग के ऐतिहासिक महोत्सव के कारण उन्हें आदिवासियों की शौर्य गाथा और गौरवशाली इतिहास को करीब से जानने का अवसर मिला है. राज्यपाल ने अपने संबोधन के दौरान आदिवासी क्षेत्र में शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर जोर देते हुए पूर्व सीएम और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को भी याद किया. साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस जिले में सरकार मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने का और भी प्रयास करेगी. उन्होंने डांग में सापूतारा हिल स्टेशन पर पर्यटन के मद्देनजर सुविधाएं बढ़ाने पर जोर दिया.

डांग दरबार में राज्य सरकार के मंत्री भी शामिल होते रहे हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व गुजरात के पूर्व मंत्री अमित शाह भी शामिल हो चुके हैं डांग दरबार में. (फोटो साभारः अमित शाह.कॉम)

डांग दरबार में राज्य सरकार के मंत्री भी शामिल होते रहे हैं. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व गुजरात के पूर्व मंत्री अमित शाह भी शामिल हो चुके हैं डांग दरबार में. (फोटो साभारः अमित शाह.कॉम)

किसको कितनी मिली पेंशन
डांग दरबार के दौरान सरकार द्वारा पूर्व राजाओं को जो वार्षिक पेंशन दी जाती है उसे आदिवासी समाज में ‘सालियाना’ कहा जाता है. इसके तहत डांग के पूर्व राजा और उनके भाई-बंधुओं को पेंशन राशि दी जाती है. 2018 में सरकार ने जो क्षेत्र के पांच राजाओं को 21 लाख रुपए से ज्यादा की पेंशन दी है. इसमें किरण सिंह यशवंतराव पवार- गाढ़वी राज को 95,412, त्रिकमराव साहेबराव पवार- पिंपरी राज को 78,432, भंवरसिंह हसुसिंह- आमला राज को 72,036, तपतराव आनंदराव पवार- दहेर राज को 64,956 और धनराज सिंह चंद्रसिंह सूर्यवंशी- वासुर्णा राज को 58,440 रुपए की सालाना राजनीतिक पेंशन दी गई. इसके बाद जिले के नौ नायकों और 668 परिजनों तथा उनके भाई-बंधुओं को वार्षिक 17 लाख 61 हजार रुपए की पेंशन दी गई.

गुजरात के राज्यपाल भी डांग दरबार में आ चुके हैं. (फोटो साभारः राजभवन.गुजरात.गॉव.इन)

गुजरात के राज्यपाल भी डांग दरबार में आ चुके हैं. (फोटो साभारः राजभवन.गुजरात.गॉव.इन)

2012 में नरेंद्र मोदी ने पेंशन में की थी 25 फीसदी की वृद्धि
गुजरात के पूर्व सीएम और वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी ने 2012 के 1 अप्रैल की तारीख से डांग के आदिवासी राजाओं के पेंशन में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दी थी. इस दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि वनवासी बहुल क्षेत्र डांग जिले के पूर्व राजाओं, नायकों और भाउबंधों से उनके आधिपत्य वाली जंगल की जमीन-जागीर और जंगल क्षेत्र हस्तगत करने के बदले और उनके मूलभूत हकों तथा विशेष अधिकारों के भाग रूप में राजनैतिक पेंशन वर्ष 1954 से वार्षिक, स्थायी और पैतृक तौर पर दी जा रही है. राज्य सरकार ने इस पेंशन में 1 अप्रैल, 2012 से 25 फीसदी की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. इसका लाभ डांग के पांच राजाओं, 9 नायकों और 653 भाउबंधों को प्राप्त होगा.

अनोखा है डांग के इन राजाओं का इतिहास
गुजरात के प्रसिद्ध हिल स्टेशन सापूतारा के लिए प्रसिद्ध इस आदिवासी जिले का इतिहास अपने आप में अनोखा है. 2011 की जनगणना के अनुसार महज 2.26 लाख की आबादी वाले इस जिले में 95 फीसदी आबादी आदिवासियों की है. सन् 1800 के आसपास अंग्रेजों ने इस क्षेत्र पर आधिपत्य जमाने का प्रयास किया, लेकिन यहां के राजाओं के सामने उनकी एक न चली. आखिरकार 1842 में ब्रिटिश राज ने डांग के आदिवासी राजाओं से एक संधि की. राजाओं की इसी विजय को याद करने के लिए इस संधि के बाद से यहां पर होली के अवसर पर सालाना डांग दरबार का आयोजन किया जाने लगा. सबसे पहला डांग दरबार वर्ष 1894 में आयोजित किया गया था. अंग्रेजों के शासनकाल में कोई ब्रिटिश अधिकारी डांग दरबार का आयोजन करता था. अब डांग जिले के कलेक्टर इस समारोह की मेजबानी करते हैं.

सापुतारा हिल स्टेशन की एक झलक. (फोटो साभारः गुजरात टूरिज्म)

सापुतारा हिल स्टेशन की एक झलक. (फोटो साभारः गुजरात टूरिज्म)

 

गुजरात का हिल स्टेशन भी है डांग
भारत के पश्चिमी राज्य गुजरात का डांग जिला इस प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन भी है. सह्याद्री पर्वत की चोटियां इस स्थान को मनोरम बनाती हैं, जिसके कारण हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं. बरसात के दिनों में तो इस जिले की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है. जहां-तहां बहते झरने, साफ पानी की बरसाती नदियां और विशाल वन क्षेत्र इस जगह को बेहिसाब खूबसूरती मुहैया कराते हैं. इसी जिले का सापुतारा पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण है. समुद्रतल से लगभग 1000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थान अपने ‘सनराइज प्वाइंट’ और ‘सनसेट प्वाइंट’ के लिए विशेष रूप से जाना जाता है. इसके अलावा रोप-वे, गीरा फॉल और कई गार्डन्स यहां पर्यटकों को मनोरम अनुभव देते हैं. यह सूरत से लगभग 160 किलोमीटर दूर है. यहां तक पहुंचने के लिए आप नैरोगेज ट्रेन की यात्रा का रोमांचक आनंद भी उठा सकते हैं.