नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में बारामूला के रामपुर सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश कर रहे 6 आतंकियों को सेना के जवानों ने ढेर कर दिया. मारे गए आतंकवादियों में टॉप हिज्बुल कमांडर सबज़ार अहमद भट्ट भी शामिल था. सबज़ार का मारा जान सेना के लिए ये बड़ी सफलता है. सबज़ार को बुरहान वानी के बाद हिज्बुल की कमान सौंपी गई थी. Also Read - कश्मीर घाटी में आ चुके हैं खतरनाक ‘स्टिकी बम’! नए सिरे से एसओपी तैयार कर रही है सेना

– पिछले साल जुलाई में बुरहान वानी के मारे जाने के बाद सबज़ार अहमद भट्ट हिज्बुल की कमान संभाल रहा था. सबज़ार को ‘सब डॉन’ के नाम से भी जाना जाता था. हिज्बुल की ओर से शेयर किए गए वीडियो और फोटो में सबज़ार जरूर दिखता था. Also Read - भारतीय सेना से जुड़ने का यह है आसान तरीका! ऐसे करेंगे तैयारी तो पूरा हो जाएगा आपका सपना | Watch Video

– कश्मीर में सबज़ार को A++ कैटेगरी वाले आंतकी में रखा गया था. सबज़ार त्राल इलाके में काफी लोकप्रिय था. दक्षिण कश्मीर के त्राल का निवासी सबजार बुरहान वानी का दायां हाथ था. सबज़ार ने वानी के साथ दो साल तक काम किया. सबज़ार को हिजबुल के सभी कॉन्टैक्ट और लिंक्स के बार में पता था. Also Read - Indian Army Recruitment 2021: 12वीं पास के लिए भारतीय सेना में अप्लाई करने की कल है अंतिम डेट. इस Direct Link से करें आवेदन  

– सबज़ार जिस लड़की से प्यार करता था. उस लड़की के परिवार के पास जाकर शादी का प्रस्ताव दिया, लेकिन परिवार ने प्रस्ताव ठुकरा दिया. इसके बाद सबज़ार ने आतंक की दुनिया में आने का फैसला कर लिया.

-सबज़ार बुरहान वानी का बचपन का दोस्त था. वानी के बड़े भाई खालिद की हत्या के बाद हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान सबज़ार ने सेना के एक अधिकारी से राइफल छिन लिया था. इसके बाद से सबज़ार हिजबुल का अहम सदस्य बन गया था.

-सबज़ार के ऊपर 10 लाख रुपये का इनाम था और माना जाता है कि उसे भारतीय सरजमीं पर ही ट्रेनिंग दी गई थी. इसी साल मार्च में सेना और आतंकियों के बीच गोलीबारी के दौरान सबज़ार सेना के जाल में फंसा था, लेकिन रात के अंधेरे और पत्थरबाजों की मदद से भागने में कामयाब रहा. पंच, सरपंच और सुरक्षाबलों के अलावा सबजार ने उन लोगों को भी मौत के घाट उतारा था जिन्हें सेना का मुखबिर समझा जाता था.