नई दिल्ली: देशभर में होली का त्योहार धूम-धाम से मनाया जा रहा है. हिंदू पंचांग के मुताबिक फाल्गुन माह में पूर्णिमा के दिन होली मनाई जाती है. देश के दूसरे त्योहारों की तरह होली को भी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है. होली के दिन गुलाल और अबीर के अलावा कई तरह के रंगों का प्रयोग किया जाता है. भारत में मथुरा की होली काफी प्रसिद्ध है. इस खास मौके पर गूगल ने डूडल बनाया है. इसमें कई लोग ढोल बजाते और डांस करते नजर आ रहे हैं. गूगल ने अपने डूडल के जरिए होली को ‘हिन्दुओं का वसंत त्योहार’ बताया है जिसे भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी राज्यों में मनाया जाता है. इसे रंगों का त्योहार भी कहते हैं Also Read - Teacher's Day पर Google ने बनाया यह खास Doodle, देखकर स्कूल की यादें हो जाएंगी ताजा...

होली के दिन ढोल की धुन और घरों के लाउड स्पीकरों पर बजते तेज संगीत के साथ एक दूसरे पर रंग और पानी फेंकने का मजा देखते ही बनता है. होली के साथ कई प्राचीन पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हैं और हर कथा अपने आप में विशेष है. यह रंगो का त्योहार कब से शुरू हुआ इसका जिक्र भारत की विरासत यानी कि हमारे कई ग्रंथों में मिलता है. Also Read - Summer Season 2020: गर्मी के मौसम की हुई शुरुआत, जानिए क्या है आज के गूगल के डूडल का असली मतलब

एक पौराणिक कथा हिरण्यकश्यप और उसकी बहन होलिका की है. प्राचीन काल में अत्याचारी हिरण्यकश्यप ने तपस्या कर भगवान ब्रह्मा से अमर होने का वरदान पा लिया था. उसने ब्रह्मा से वरदान में मांगा था कि उसे संसार का कोई भी जीव-जन्तु, देवी-देवता, राक्षस या मनुष्य रात, दिन, पृथ्वी, आकाश, घर, या बाहर मार न सके. वरदान पाते ही वह निरंकुश हो गया. उस दौरान परमात्मा में अटूट विश्वास रखने वाला प्रहलाद जैसा भक्त पैदा हुआ. प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था और उसे भगवान विष्णु की कृपा-दृष्टि प्राप्त थी. हिरण्यकश्यप ने सभी को आदेश दिया था कि वह उसके अतिरिक्त किसी अन्य की स्तुति न करे, लेकिन प्रहलाद नहीं माना. Also Read - Google ने नई बोतल में परोसी पुरानी शराब, CT-17 का डूडल फिर हुआ जारी