नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर से धारा 370 (Article 370) हटाने और राज्य के बंटवारे के फैसले को राज्यसभा में मंजूरी मिलने के साथ ही विपक्षी एकता खंड-खंड हो चुकी है. इस मामले पर प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस में ही अलग-अलग सुर सुनने में आ रहे हैं. यूं तो लोकसभा में सोमवार को ही गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने इस मामले में संबंधित संकल्प पेश कर दिया था. लेकिन विपक्षी पार्टियों के वॉकआउट करने से इस पर चर्चा नहीं हो सकी. लिहाजा, गृह मंत्री आज एक बार फिर लोकसभा में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 (Jammu and Kashmir Reorganisation Bill, 2019) पेश करेंगे. यह एक तरह से विपक्षी एकता के जख्म को फिर से कुरेदने जैसा होगा. आपको बता दें कि राज्यसभा द्वारा मंजूर किए इस विधेयक के तहत जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया है. जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा, जबकि लद्दाख में ऐसी व्यवस्था नहीं होगी.

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गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में जम्मू कश्मीर राज्य का पुनर्गठन करने और जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के प्रस्ताव संबंधी संकल्प पेश किया. इसके विरोध में कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने सदन से वाकआउट किया. राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत विशेष दर्जा समाप्त करने के आदेश के बाद प्रस्ताव पेश करते हुए शाह ने सदन से संकल्प पेश करने की अनुमति मांगी. उन्होंने विपक्षी सदस्यों को अश्वस्त किया कि वह मंगलवार को सदन में चर्चा के लिये विधेयक एवं संकल्प पेश करेंगे और सदन में इसे पेश करने की आज सिर्फ अनुमति मांग रहे हैं.

विपक्षी दलों के विरोध के बीच शाह ने कहा, ‘‘ मैं विधेयक को चर्चा एवं पारित होने के लिये कल पेश करूंगा. विपक्ष इस पर विस्तृत चर्चा कर सकता है. मैं जवाब देने को तैयार हूं.’’ इस दौरान विपक्षी दलों ने जोरदार विरोध किया जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर इसका स्वागत किया. कांग्रेस, द्रमुक, तृणमूल कांग्रेस, एआईएमआईएम सहित विपक्षी दलों के सदस्य संकल्प पर अपनी बात रखना चाहते थे और इसकी अनुमति नहीं मिलने पर बाद में विपक्षी सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया.

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गृह मंत्री की ओर से पेश संकल्प में कहा गया है, ‘‘भारत के राष्ट्रपति ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत इस सदन में जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 विचार के लिए भेजा है.’’ इसमें कहा गया है कि 19 दिसंबर 2018 को राष्ट्रपति की अधिघोषणा के बाद जम्मू कश्मीर राज्य विधायिका की शक्ति इस सदन को है. यह सदन जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 को विचार के लिए स्वीकार करता है.

(इनपुट – एजेंसी)