नई दिल्ली: केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से बातचीत की और सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकवादियों के घातक हमले के बाद की राज्य की स्थिति का जायजा लिया. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बिहार में शुक्रवार का अपना कार्यक्रम भी रद्द कर दिया. वह जम्मू कश्मीर जा सकते हैं. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि गृहमंत्री ने राज्यपाल से बाचतीत की, जिन्होंने उन्हें राज्य की वर्तमान स्थिति के बारे में बताया. सिंह ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महानिदेशक आर.आर. भटनागर से भी बातचीत की और उन्हें जरूरी निर्देश दिए. गृह मंत्रालय स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है.

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सिंह ने ट्वीट किया, पुलवामा में सीआरपीएफ पर आज का कायराना हमला बहुत ही पीड़ाजनक और विचलित कर देने वाला है. मैं सीआरपीएफ के हर उस जवान को नमन करता हूं, जिसने देश की सेवा में अपनी जान कुर्बान की है.” पुलवामा जिले में जैश ए मोहम्मद के एक आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे एक वाहन को सीआरपीएफ की एक बस से टकरा दिया. इस विस्फोट में सीआरपीएफ के कम से कम 30 कर्मी शहीद हुए हैं. ये जवान इस बस से जा रहे थे. यह हमला 2016 में हुए उरी हमले के बाद से राज्य में सबसे भीषण आतंकी हमलों में एक है. पुलवामा जिले में बृहस्पतिवार को जैश-ए-मोहम्मद के एक फिदायिन हमले में सीआरपीएफ के तीस जवान शहीद हो गए. अधिकारियों ने यह जानकारी दी.

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अधिकारियों के अनुसार, जैश के आतंकवादी ने विस्फोटकों से लदे वाहन से सीआरपीएफ जवानों को ले जा रही बस को टक्कर मार दी, जिसमें कम से कम 30 जवान शहीद हो गए. यह 2016 में हुए उरी हमले के बाद सबसे भीषण आतंकवादी हमला है. केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के 2500 से अधिक कर्मी 78 वाहनों के काफिले में जा रहे थे. इनमें से अधिकतर अपनी छुट्टियां बिताने के बाद अपने काम पर वापस लौट रहे थे. जम्मू कश्मीर राजमार्ग पर अवंतिपोरा इलाके में लाटूमोड पर इस काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया.

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पुलिस ने आत्मघाती हमला करने वाले वाहन को चलाने वाले आतंकवादी की पहचान पुलवामा के काकापोरा के रहने वाले आदिल अहमद के तौर पर की है. अहमद 2018 में जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हुआ था. हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है. आतंकवादी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी ली है. यह हमला श्रीनगर से करीब 30 किलोमीटर दूर हुआ है.विस्फोट में 20 से अधिक लोग घायल हो गए. धमाका इतना जबरदस्त था कि बस के परखच्चे उड़ गए और आस पास बिखरे क्षत-विक्षत शवों को देखा जा सकता है.

सीआरपीएफ के महानिदेशक आरआर भटनागर ने बताया, यह एक विशाल काफिला था और करीब 2500 सुरक्षाकर्मी विभिन्न वाहनों में जा रहे थे.काफिले पर कुछ गोलियां भी चलाई गई. यह काफिला जम्मू से तड़के साढ़े तीन बजे चला था और माना जा रहा था कि इसे सूर्यास्त तक श्रीनगर पहुंचना था. अधिकारियों ने बताया कि घाटी लौट रहे कर्मियों की संख्या अधिक थी, क्योंकि राजमार्ग पर पिछले दो-तीन दिन से खराब मौसम और अन्य प्रशासनिक कारणों से कोई आवाजाही नहीं हो रही थी.

आम तौर पर काफिले में करीब 1000 कर्मी चलते हैं, किंतु इस बार कर्मियों की कुल संख्या 2547 थी. अधिकारियों ने बताया कि सड़क पर मार्ग को परखने के लिए एक दल को तैनात किया गया था और काफिले में आतंक निरोधक बख्तरबंद वाहन मौजूद थे. फारेंसिक एवं बम विश्लेषक दल मौके पर पहुंच गए हैं. हमले के केंद्र में रही बस बल की 76वीं बटालियन की थी और उसमें 39 कर्मी सवार थे. कश्मीर घाटी में सीआरपीएफ के महानिरीक्षक (अभियान) जुल्फीकार हसन ने इसे वाहन से किया गया हमला करार दिया और कहा कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने मामले की जांच अपने हाथ में ली है.