फ्यूल क्राइसिस के बीच बिहार के 6 जिलों में मॉकड्रिल, 15 मिनट का ब्लैकआउट, जानें क्या आपको पैनिक करने की जरूरत?
गृह मंत्रालय के निर्देश पर पटना समेत बिहार के 6 जिलों किशनगंज, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया और कटिहार में मॉक ड्रिल हुई. इस दौरान सड़कों पर ट्रैफिक को रोक दिया गया और 15 मिनट के लिए ब्लैकआउट भी छाया रहा.
पटना में मॉक ड्रिल की खास तैयारी की गई थी. करीब 100 जगहों पर सायरन बजाया गया. (ANI)
मिडिल ईस्ट में बढ़ रहे तनाव से सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. PM मोदी ने 3 अलग-अलग मौकों पर देशवासियों से फ्यूल बचाने और रिसोर्सेज का सोच-समझकर इस्तेमाल करने की अपील की है. इस बीच गुरुवार को देश के 6 जिलों में मॉक ड्रिल हुई. गृह मंत्रालय के निर्देश पर बिहार के 6 जिलों पटना, किशनगंज, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया और कटिहार में मॉक ड्रिल कराई गई. शाम 7 बजे सायरन बजने के साथ 15 मिनट के लिए बत्ती गुल हो गई. ट्रैफिक को रोक दिय गया. इस दौरान आमलोगों से भी घर से बाहर तक सभी तरह की लाइट बुझाकर मॉक ड्रिल में सहभागी बनने की अपील की गई.
राज्य सरकार के मुताबिक, ये किसी खतरे की स्थिति नहीं बल्कि नागरिक सुरक्षा व्यवस्था, आपदा प्रबंधन क्षमता और प्रशासनिक तैयारियों को परखने के लिए की जा रही प्रैक्टिस है. सरकार ने लोगों से डरने की बजाय सहयोग की अपील की.
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क्यों हुई मॉकड्रिल?
गृह मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग से मिडिल ईस्ट में हालात खराब हो रहे हैं. ऐसे में किसी भी तरह की एयर स्ट्राइक से बचने के लिए अपनी तैयारियों को लेकर ये मॉकड्रिल की जाती है. बिहार की राजधानी पटना में मॉक ड्रिल 2 पार्ट में की गई. पटना के DM ऑफिस और बिस्कोमान भवन में दोपहर 3 बजे मॉक ड्रिल शुरू हुई. 40 से 45 मिनट चली मॉक ड्रिल में सुरक्षा की जांच की गई.
कैसे हुई मॉकड्रिल?
7 बजे मॉकड्रिल शुरू हुई. ADM आपदा ने वॉकी-टॉकी पर कहा कि पटना DM ऑफिस और बिस्कोमान भवन पर एयर स्टाइक हुई है. जल्दी मदद भेजिए. उनके ये कहते ही 2 मिनट में मौके पर NDRF और SDRF टीमें पहुंच गईं. एंबुलेंस भी घायलों को लेने के लिए मौके पर पहुंची. घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया.
फायर फाइटर्स ने दिखाया एक्शन
फायर फाइटर्स की मदद से पटना DM ऑफिस और बिस्कोमान भवन में लगी आग को बुझाया गया. बिल्डिंग के ऊपरी हिस्सों में फंसे लोगों को बड़ी और लंबी क्रेन की मदद से रेस्क्यू किया गया.
मॉकड्रिल के दौरान क्या होता है?
- घरों और दुकानों की लाइट बंद कराई जाती हैं.
- स्ट्रीट लाइट्स बंद की जाती हैं.
- खिड़कियों को ढकने के निर्देश दिए जाते हैं.
- सायरन बजाकर लोगों की प्रतिक्रिया जांची जाती है.
ब्लैकआउट क्यों हुआ?
मॉकड्रिल के दौरान ब्लैकआउट इसलिए किया जाता है, ताकि आपातकालीन स्थिति—जैसे हवाई हमला, युद्ध, ड्रोन अटैक या बड़े सुरक्षा खतरे के समय लोगों और प्रशासन की तैयारी को परखा जा सके.
ब्लैकआउट में क्या होता है?
ब्लैकआउट में इलाके की लाइटें बंद कर दी जाती हैं, ताकि दुश्मन को ऊपर से शहर, सैन्य ठिकाने या महत्वपूर्ण इमारतों की लोकेशन आसानी से न दिखे. अंधेरे में एयर स्ट्राइक या ड्रोन हमले में निशाना लगाना मुश्किल हो जाए. लोगों को इमरजेंसी प्रोटोकॉल की ट्रेनिंग मिल सके.
क्या आपको पैनिक करने की जरूरत?
नहीं. मॉकड्रिल और ब्लैकआउट का मकसद घबराहट फैलाना नहीं, बल्कि यह देखना होता है कि किसी संकट की स्थिति में प्रशासन और आम लोग कितनी तेजी और अनुशासन से काम कर सकते हैं. इसलिए इन चीजों से आपको पैनिक करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है.
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