नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय में सोमवार को होने वाली एक उच्च- स्तरीय बैठक में ‘ कीपैड जिहादियों ’ की ओर से विभिन्न सोशल नेटवर्किंग साइटों पर डाली गई दुर्भावनापूर्ण सामग्रियों को हटाने के मुद्दे पर चर्चा होगी. ‘कीपैड जिहादी’ उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जो मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए अफवाह फैलाकर या किसी घटना को सांप्रदायिक रंग देकर कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की मंशा से इंटरनेट पर जहर उगलते हैं. अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह सचिव राजीव गॉबा की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग, सुरक्षा एजेंसियों और जम्मू-कश्मीर के आला अधिकारी हिस्सा लेंगे.

इन मुद्दों पर होगी चर्चा
उन्होंने बताया कि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर डाली जाने वाली दुर्भावनापूर्ण सामग्री की समस्या से निपटने में सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूचना प्रौद्योगिकी के प्रावधानों पर बैठक में चर्चा होगी जिसमें केस दर्ज किए जाने का मसला भी शामिल होगा. इसके अलावा, सेवा प्रदाता से समन्वय कायम कर जल्द से जल्द दुर्भावनापूर्ण सामग्री को सोशल साइटों से हटाने और तेज कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित करने पर भी मंथन होगा ताकि यह दूसरों के लिए सबक बन सके.

देश के कई हिस्सों में फैला है ग्रुप
‘कीपैड जिहादियों’ पर सख्ती का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि सुरक्षा एजेंसियां (कंप्यूटर / मोबाइल के) कीपैड का इस्तेमाल कर सरकारी मशीनरी के खिलाफ जंग छेड़ने वालों की बजाय हथियारों से लैस आतंकवादियों को गिरफ्तार करने या उन्हें ढेर करने पर ज्यादा ध्यान दे सके. अधिकारियों ने कहा कि यह जंग का एक आभासी मैदान है जहां शब्दों से खूनी लड़ाइयां लड़ी जाती हैं. युवा मन पर इनका गहरा प्रभाव होता है. सोशल साइटों के चैट ग्रुप सिर्फ जम्मू-कश्मीर में सक्रिय नहीं हैं. राष्ट्रीय राजधानी, देश के अन्य हिस्सों और यहां तक कि विदेशों में भी इन ग्रुपों में नौजवानों की भागीदारी देखी जा रही है.

अमरनाथ यात्रा चिंता का विषय
हाल में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पांच ट्विटर हैंडलों के खिलाफ केस दर्ज किया था और फेसबुक एवं वॉट्सऐप पर गुमराह करने वाले पोस्ट को लेकर सेवा प्रदाताओं के खिलाफ शिकायतें दाखिल की थी ताकि जल्द से जल्द जरूरी कार्रवाई की जा सके. अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल आगामी अमरनाथ यात्रा चिंता का विषय है. उन्हें आशंका है कि कोई शख्स हजारों चैट ग्रुप में से किसी एक पर फर्जी खबर फैला सकता है और पूरा राज्य सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में आ सकता है.