नई दिल्ली। बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने समलैंगिकता को हिंदुत्व के खिलाफ बताते हुए इस पर जश्न नहीं मनाने की नसीहत दी है. उनका कहना है कि इसकी जगह भारत को मेडिकल रिसर्च में निवेश करना चाहिए ताकि इसका इलाजा ढूंढ़ा जा सके. स्वामी का बयान सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के संदर्भ में आया है जिसके तहत दो व्यस्कों के बीच समलैंगिक संबंधों को अपराध माना जाता है.

समलैंगिकता हिंदुत्व के खिलाफ- स्वामी

स्वामी ने कहा, समलैंगिकता सामान्य चीज नहीं है. हम इस पर जश्न नहीं मना सकते. यह हिंदुत्व के खिलाफ है. हमें मेडिकल रिसर्च पर निवेश करना चाहिए और देखना चाहिए कि इसका इलाज हो सकता है या नहीं. सरकार को 7 या 9 जजों वाली बैंच का गठन करना चाहिए.

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ये पहली बार नहीं है जब स्वामी ने समलैंगिकता का विरोध किया है. इससे पहले जनवरी में स्वामी ने आईपीसी की धारा 377 का बचाव करते हुए कहा था कि जो भी लोग समलैंगिकता में लिप्त हैं उनके खिलाफ सख्त सजा का प्रावधान होना चाहिए.

स्वामी ने कहा था, जब तक कि इसके समर्थक इसका जश्न नहीं मनाते, इसका सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं करते, पार्टनर चुनने के लिए गे बार नहीं बनाते, इससे कोई दिक्कत नहीं है. जब तक वे इसे निजी बनाए रखते हैं किसी को दिक्कत नहीं होगी. लेकिन अगर इसका खुलेआम प्रदर्शन होता है तो सजा दी जानी चाहिए. इसीलिए धारा 377 बने रहना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट में धारा 377 पर अहम सुनवाई

सु्प्रीम कोर्ट में आज धारा 377 को चुनौती देने वाली याचिका पर अहम सुनवाई हो रही है. सोमवार को अदालत ने मामले की सुनवाई टालने वाली केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी थी. पांच जजों की नई बेंच इस मामले पर सुनवाई करेगी जिसमें याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि दो व्यस्कों के बीच आपसी सहमति से समलैंगिक संबंध बनाना गलत नहीं है. इस बेंच की अगुवाई चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा कर रहे हैं, इसके अलावा इसमें जस्टिस आरएफ नरीमन, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ सिंह और इंदु मल्होत्रा हैं.