नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम. केरल में मानसूनी बारिश और बाढ़ के कारण शुक्रवार को एक ही दिन में 106 लोगों की मौत के बीच राज्य में ऑक्सीजन की कमी और ईंधन स्टेशनों में ईंधन नहीं होने के कारण आज संकट और गहरा हो गया. राज्य में अबतक 385 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 3 लाख से ज्यादा लोगों को पलायन करना पड़ा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केरल पहुंचे और सीएम विजय रुपानी के साथ मौजूदा हालत पर बैठक की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल का हवाई सर्वे किया. उन्होंने राज्य को तत्काल प्रभाव से 5 सौ करोड़ रुपये देने की घोषणा की. यह राशि पहले से घोषित 100 करोड़ रुपये से अतिरिक्त है. उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये देने की भी घोषण की.

रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) सहित सेना के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया है. शनिवार की सुबह कई स्थानों पर आरपीएफ के जवान राहत सामग्री बांटते और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते देखे गए हैं. हजारों लोग अलग-अलग जगहों पर फंस हुए हैं.

बीते आठ अगस्त से अब तक केरल में जल प्रलय ने 173 लोगों की जान ले ली है. बाढ़ के कारण खूबसूरत राज्य को गहरा धक्का लगा है और पर्यटन उद्योग बहुत प्रभावित हुआ है. हजारों एकड़ खेत में खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं. बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचा है.

अलग-अलग जगहों पर फंसे 80,000 से ज्यादा लोगों को शुक्रवार को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया. इनमें 71,000 से ज्यादा लोग बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित एर्नाकुलम जिले के अलुवा क्षेत्र से थे. तीनों सेनाओं के अलावा राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के जवानों ने छतों और ऊंची जगहों पर फंसे लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाने का दुरूह काम फिर से शुरू किया. पहाड़ी इलाकों में पहाड़ के हिस्से जमीन पर गिरने से सड़क जाम हो रहे हैं, जिससे बाकी जगहों से उनका संपर्क टूट जा रहा है. द्वीप की शक्ल ले चुके कई गांवों में फंसे लोगों को निकालने का अभियान भी जारी है.