
Parinay Kumar
परिणय कुमार को पत्रकारिता में लगभग 14 साल का अनुभव है. वह करियर की शुरुआत से ही पॉलिटिकल और स्पोर्ट्स की खबरें लिखते रहे हैं. 2008 में बिहार के ललित ... और पढ़ें
चंद्रयान-3 लॉन्च के बाद से ही अपने मिशन की ओर सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की तरफ से समय-समय पर चंद्रयान-3 (Chandrayaan-3) से जुड़ीं जानकारी दी जा रही हैं. ISRO ने बार-बार अपडेट देकर बताया है कि चंद्रयान-3 धीरे-धीरे चंद्रमा के काफी करीब पहुंच गया है. चंद्रयान के लिए आज का दिन काफी अहम है. ISRO ने बताया कि चंद्रयान-3 अब चंद्रमा की निकटवर्ती ऑर्बिट में पहुंच गया है. आज यानी 16 अगस्त सुबह करीब साढ़े 8 बजे ISRO की तरफ से चंद्रयान-3 को 100 किमी की ऑर्बिट तक पहुंचाने के लिए एक और प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा. वहीं, 17 अगस्त का दिन भी बेहद खास है, क्योंकि इस दिन ISRO चंद्रयान-3 को प्रोपल्शन मॉड्यूल को लैंडर से अलग करेगा.
Chandrayaan-3 Mission:
Orbit circularisation phase commencesPrecise maneuvre performed today has achieved a near-circular orbit of 150 km x 177 km
The next operation is planned for August 16, 2023, around 0830 Hrs. IST pic.twitter.com/LlU6oCcOOb
— ISRO (@isro) August 14, 2023
चंद्रयान-3 को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से 14 जुलाई को रवाना किया गया था और इसके 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पर सॉफ्ट लैंडिंग की उम्मीद की जा रही है. अगर लैंडर विक्रम सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर उतर जाता है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा कारनामा करने वाला चौथा देश बन जाएगा. अमेरिका ने अपने अपोलो मिशन के दौरान चंद्रमा की सतह पर उतरने की सफलता हासिल की थी. सोवियत संघ (रूस) ने लुना के जरिये से चंद्रमा की सतह पर उतरने की सफलता हासिल की थी. लुना-2 मिशन के द्वारा 1959 में रूस पहला यान सफलतापूर्वक चंद्रमा की सतह पर पहुंचा था. वहीं, चीन ने चंद्रयान-3 मिशन के माध्यम से 2019 में चंद्रमा की सतह पर यान को उतारने की सफलता हासिल की थी.
प्रश्न यह है कि आखिर भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ही चंद्रयान क्यों उतार रहा है. इससे पहले चंद्रयान-2 को भी दक्षिणी ध्रुव पर उतारने की कोशिश की गई थी, जो असफल रहा, अब एक बार फिर चंद्रयान-3 को भी दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जा रहा है. जिस तरह से पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुव पर बसा अंटार्कटिका काफी ठंडा है, वैसा ही चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव भी है. यह चांद का सबसे ठंडा इलाका है. भारत ही नहीं अमेरिका और चीन भी इस क्षेत्र पर नजरें गड़ाए हुए हैं. चीन कुछ साल पहले दक्षिणी ध्रुव के करीब लैंडर उतार चुका है और अमेरिका तो वहां अपने अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की तैयारी कर रहा है.

ISRO ने चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को लॉन्च किया था.
अगर आपको चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर खड़ा होने का अवसर मिले तो आपको सूर्य क्षितिज रेखा पर दिखाई देगा. चंद्रमा की सतह से लगा हुआ सूरज चम-चमाता हुआ नजर आएगा. चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के ज्यादातर हिस्से में छाया रहती है. यहां धरती के दक्षिणी ध्रुव की ही तरह सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती हैं और तापमान काफी कम होता है. वैज्ञानिकों का अंदाजा है कि तापमान कम होने के कारण यहां पानी और अन्य खनिज हो सकते हैं. चंद्रयान-1 चंद्रमा पर पानी की खोज पहले ही कर चुका है.
NASA की रिपोर्ट के मुताबिक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ है और वहां दूसरे प्राकृतिक संसाधन भी हो सकते हैं. साल 1998 में नासा के मून मिशन में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर हाइड्रोन की मौजूदगी का पता लगा था. नासा के अनुसार हाइड्रोजन की मौजूदगी वहां बर्फ होने का सबूत हो सकता है. जानकारी के अनुसार चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर बड़े पहाड़ और कई बड़े-बड़े क्रेटर्स हैं. यहां सूरज की रोशनी भी यहां बहुत कम पड़ती है.
ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें India Hindi की और अन्य ताजा-तरीन खबरें
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.