
Shivendra Rai
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रहने वाले शिवेन्द्र राय को हिंदी डिजिटल पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से इतिहास में एमए ... और पढ़ें
Military infrastructure push across the Himalayas: भारत लगातार चीन के साथ लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत कर रहा है. चीन सीमा से सटे इलाकों में भारत ने बड़े पैमाने पर आधार-भूत बुनियादी ढांचों का निर्माण किया है. इसमें सड़कें, हवाई पट्टियां, पुल, सुरंगें और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट शामिल हैं.
2020 में गलवान में हुई घातक झड़प के बाद भारत ने भारी संख्या में सैनिक लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर तैनात किए थे. लेकिन, इस दौरान एक कमी का भी पता चला. भारत के लिए अपने पहाड़ी सीमा पर अतिरिक्त सैनिकों और सप्लाई को पहुंचाने में लॉजिस्टिकल कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था. दूसरी तरफ चीन ने काफी पहले से ही सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का काम शुरू कर दिया था.
चीन ने सड़कों और रेलवे के व्यापक नेटवर्क का उपयोग करके कुछ ही घंटों में सीमा पर सैनिकों को तैनात करने की क्षमता हासिल कर ली है. लेकिन, भारत को ऊबड़-खाबड़ इलाके और सीमित कनेक्टिविटी के कारण एक सप्ताह तक का समय लग सकता था. इसके बाद सेना ने महसूस किया कि चीन सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के काम में अभूतपूर्व तेजी लानी होगी.
चीन से लगती सीमा पर सैन्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है ज़ोजिला सुरंग. इसे हिमालय में लगभग 11,500 फीट की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है. इसकी लागत 750 मिलियन डॉलर से अधिक है और इसे बनाने की शुरुआत 2020 की झड़प के महीनों बाद हुई. इस सुरंग को स्मार्ट टनल के रूप में विकसित किया जा रहा है. पहले सर्दियों में लद्दाख देश के अन्य हिस्सों से कट जाता था. केवल हवाई मार्ग ही पहुंचने का तरीका था. लेकिन ज़ोजिला सुरंग के माध्यम से हर मौसम में कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी.
भारत ने सीमा क्षेत्रों में 30 से अधिक हेलीपैड बनाए हैं. सीमा के साथ लगती कई हवाई पट्टियों को अपग्रेड भी किया गया है. लद्दाख में लगभग 14,000 फीट की ऊंचाई पर बनाया गया न्योमा एयरबेस इनमें सबसे खास है. यह चीनी सीमा से सिर्फ़ 19 मील दूर है और यहां C-130J जैसे भारी ट्रांसपोर्ट विमान और सुखोई फाइटर लैंड कर सकते हैं.
अरुणाचल प्रदेश पर चीन की हमेशा से बुरी नजर रही है. पिछले कुछ सालों में BRO द्वारा इस राज्य में बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण, रणनीतिक पुलों का निर्माण, और रणनीतिक महत्व वाली सुरंगे बनाई गई हैं. इन सबका मकसद चीन की बढ़ती सैन्य ताकत के मुकाबले लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर सैनिकों की आवाजाही और मौजूदगी को बढ़ाना है.
बीते 8 दिसंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख में अहम श्योक सुरंग सहित 125 सीमा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि ये न सिर्फ सैनिकों और हथियारों की तेज़ आवाजाही सुनिश्चित करेंगे, बल्कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए भी मददगार होंगे.
लद्दाख में दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी रोड पर 920 मीटर लंबी श्योक सुरंग के अलावा 28 सड़कों, 93 पुलों और चार अन्य प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन किया गया जो लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और मिजोरम में फैले हुए हैं. इन्हें बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन ने कुल 5,000 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया है. ये कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और आपदा प्रबंधन के लिए जीवनरेखा हैं. भारत तेज गति से सड़कों, सुरंगों, स्मार्ट-फेंसिंग, इंटीग्रेटेड कमांड सेंटर और निगरानी प्रणालियों से अपनी सीमाओं को मज़बूत कर रहा है उसने चीन तक को अचरज में डाल दिया है. हिमालय में कोई दुस्साहस करने से पहले दुश्मन अब दस बार सोचेगा.
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