नई दिल्ली: तवां वेतन आयोग लागू होने की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, सरकारी कर्मचारियों की उम्मीदें परवान चढ़ने लगी हैं. इसे अप्रैल में लागू किए जाने की योजना है और यह तय है कि नया वित्तीय वर्ष सरकारी कर्मचारियों के वेतन में इजाफे के साथ आएगा. लेकिन कर्मचारी चिंतित इस बात को लेकर हैं वेतन में होने वाली वृद्धि उनकी उम्मीदों के अनुरूप होगा या सरकारी प्रस्ताव के अनुरूप. हालांकि, यह स्पष्ट है कि सरकारी कर्मचारियों का वेतन सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों से ज्यादा बढ़ेगा. लेकिन बैंकों में धोखाधड़ी के ताजा मामलों से इस पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. Also Read - 7th Pay Commission: मोदी सरकार का 65 लाख केंद्रीय पेंशनरों को तोहफा, दिए गए ये दिशानिर्देश

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सातवें वेतन आयोग के अनुसार न्यूनतम वेतन 7 हजार से बढ़ाकर 18 हजार रुपए और अधिकतम वेतन 90 हजार से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपए किया गया था. यह बढोतरी करीब 2.57 गुना थी और जून, 2016 में इसे केंद्री कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गई थी. Also Read - 7th Pay Commission Latest News: कोरोना संकट में तोहफा, इस राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ाई

सरकारी कर्मचारियों की मानें तो वेतन में करीब तीन गुना वृद्धि अच्छा है, लेकिन यह उनकी मांगों के अनुरूप नहीं है. कर्मचारी यूनियनों ने 3.68 गुना इजाफे की मांग की थी, जिससे न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए होता. मांग पर जोर देने के लिए यूनियनों ने धरना-प्रदर्शनों की योजना बनाई थी, लेकिन सरकार द्वारा उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के भरोसे के बाद इस योजना को अमल में नहीं लाया गया.

कर्मचारियों का मानना है कि वेतन वृद्धि की मौजूदा सिफारिशों से उनके लिए सम्मानपूर्वक जीना मुश्किल होगा. अब सवाल यह है कि सातवें वेतन आयोग की यह उलझन कैसे सुलझेगी. इसके लिए फिलहाल 1 अप्रैल तक प्रतीक्षा करनी होगी. या संभव है इससे पहले भी इस मामले में कोई फैसला आ जाए.