नई दिल्ली। गुजरात विधानसभा चुनाव में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के कांग्रेस के साथ जुड़ने की पूरी संभावना थी कि ये खबर आ गई. हार्दिक पटेल ने कांग्रेस को 3 नवंबर तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि कांग्रेस स्पष्ट करे कि पाटीदारों को संवैधानिक आरक्षण कैसे देगी, वरना उनका हाल भी वैसा ही होगा जैसा सूरत में अमित शाह का हुआ था. हार्दिक पटेल के इस ट्वीट ने जितना कांग्रेस को झटका दिया उतना ही बीजेपी भी हैरान है. सूत्रों की मानें तो अमित शाह खुद चाहते हैं कि हार्दिक पटेल जल्द से जल्द राहुल गांधी के साथ आ जाएं. आखिर इन दोनों नेताओं के साथ आने से बीजेपी को क्या फायदा होगा?
हार्दिक पटेल के लिए अग्निपरीक्षा
गुजरात में हार्दिक पटेल के लिए ये अग्निपरीक्षा का वक्त है. वो अच्छी तरह जानते हैं कि पाटीदार समाज उनके साथ है लेकिन कांग्रेस में शामिल होने के बाद भी साथ रहेगा इसमें संशय है. यही वजह है कि उन्होंने 3 नवंबर तक का अल्टीमेटम दिया है. लेकिन बीजेपी चाहती है कि हार्दिक पटेल और कांग्रेस में समझौता हो जाए. इससे पाटीदार हार्दिक से छिटककर बीजेपी के पाले में आ सकते हैं.
पाटीदार समाज को लगता है कि हार्दिक उनकी लड़ाई लड़ रहे हैं, कांग्रेस की नहीं. अगर बिना किसी ठोस करार के हार्दिक कांग्रेस में जाते हैं तो गलत संदेश जाएगा और लोग बीजेपी के पाले में जा सकते हैं. बीजेपी ने भी पाटीदारों को ईबीसी के तहत आरक्षण दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसको ख़ारिज कर दिया.
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यूपी को ये साथ पसंद हैः एक सबक
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने राहुल गांधी के साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया और नारा दिया… यूपी को ये साथ पसंद है. माना जा रहा था कि यूपी में हवा अखिलेश यादव के साथ थी. लोग उनके काम से खुश थे. लेकिन कांग्रेस के साथ गठबंधन ने उनकी लुटिया डुबो दी. इसका फायदा निश्चित तौर पर बीजेपी को हुआ. गुजरात चुनाव में यह एक सबक हो सकता है.
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हार्दिक कांग्रेस के साथ नहीं जाते तो बीजेपी के लिए मुश्किल
हार्दिक पूरी तरह पटेल समाज के आंदोलन के प्रतीक हैं. अगर वे कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाते और अपनी भूमिका अलग ही रखते हैं तो आगे बीजेपी को जबरदस्त परेशान करने वाले हैं. उनकी वजह से 2019 का चुनाव भी खराब हो सकता है क्योंकि उस वक्त तक हार्दिक पटेल 25 की उम्र पार कर चुके होंगे और खुद चुनाव भी लड़ सकते हैं.
फिलहाल गेंद हार्दिक पटेल के पाले में है. देखना दिलचस्प होगा कि 24 साल की उम्र में इस गहरी राजनीति पर उनका अगला कदम क्या होगा. उनका ये फैसला देश की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों को बड़ा फायदा या नुकसान करा सकती हैं.
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