JANMASHTMI: देश में 12 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा. इस बार मनाये जा रहे कृष्ण जन्मोत्सव कार्यक्रम पर कोरोना वायरस का असर साफ दिखाई दे रहा है. इस बार जन्माष्टमी के दौरान कृष्ण जन्मभूमि सहित ब्रज के सभी मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे. वैसे तो हर बार की तरह इस बार भी जन्मोत्सव के अवसर पर भव्य और अलौकिक छटा देखने को मिलेगी लेकिन  श्रद्धालुओ को ‘नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’ के जयकारे नहीं सुनाई देंगे. Also Read - यूपी में जन्माष्टमी के दिन क्यों गई बिजली, STF करेगी जांच, सीएम योगी ने दिए आदेश

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर श्री कृष्ण जन्मभूमि पर किस तरह की तैयारियां चल रही हैं, इसकी जानकारी संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने प्रेस कांफ्रेंस के दौरान दी. उन्होंने बताया कि श्री जन्माष्टमी का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा. भगवान श्री कृष्ण के जन्म स्थल को भव्य प्रकाश से सुसज्जित किया जाएगा.  भगवान श्रीकृष्ण पूर्णेन्दु कुंज बंगले में विराजमान होकर मनोहारी स्वरूप में भक्तों को दर्शन देंगे.इस बंगले की छटा और कला अनूठी होगी. इस विशेष पुण्य दिवस पर ठाकुर जी पुष्पदंत पोशाक धारण करेंगे. Also Read - Janmashtami 2020 Mathura: मथुरा-वृन्दावन में जन्माष्टमी की धूम, कुछ ऐसे मनाया जा रहा जश्न, देखें VIDEO

भगवान के अभिषेक में शास्त्रीय मर्यादाओं और परंपरा का पूरी तरह से पालन किया जाएगा. साथ ही यह भी ध्यान दिया जाएगा कि जो भक्त इस बार दर्शन नहीं कर पाएंगे, उनके लिए टीवी चैनलों और प्रसारण के अन्य माध्यमों से भगवान के दर्शन कराए जाएंगे, ताकि भक्तों को यह अनुभूति हो कि वे ठाकुर जी के समक्ष सम्मिलित होकर उनका दर्शन कर रहे हैं. Also Read - Janmashtami 2020 Mathura Live Streaming: मथुरा-द्वारका में लड्डू गोपाल के जन्म का लाइव प्रसारण, ऐसे देखें...

कपिल शर्मा ने बताया कि जन्माष्टमी पर जन्मोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत रात्रि 11:00 बजे से श्री गणेश नवग्रह आदि पूजन से होगी. उसके बाद भगवान का पुष्प अर्चन किया जाएगा. पुष्प अर्चन के बाद  मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे. रात्रि 11:55 के बाद भगवान के प्राकट्य के साथ ही 12 बजे भगवान की आरती शुरू हो जाएगी. उसके साथ ही संपूर्ण मंदिर ढोल नगाड़े से गुंजायमान हो जाएगा. भगवान का विग्रह  33 करोड़ देवी देवताओं के सरूपा कामधेनु गाय के दूध से किया जाएगा. संस्थान के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास जी भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे.

संस्थान के सचिव ने श्रद्धालुओं के आने व प्रसाद वितरण के संबंध में बताया कि जन्मस्थान परिसर में कोरोना के चलते श्रद्धालुओं का आगमन पूर्णतया प्रतिबंधित रहेगा. जन्म स्थान पर जो पूजा-अर्चना के साथ ही अन्य कार्यक्रम हैं, उसमें भी विगत वर्षों की अपेक्षा  सिर्फ 10% स्टाफ ही काम करेंगे.