
Parinay Kumar
परिणय कुमार को पत्रकारिता में लगभग 14 साल का अनुभव है. वह करियर की शुरुआत से ही पॉलिटिकल और स्पोर्ट्स की खबरें लिखते रहे हैं. 2008 में बिहार के ललित ... और पढ़ें
मनरेगा का नाम अब बदल गया है. सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) का नाम बदलकर’विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)- वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) कर दिया है. ‘जी राम जी’ योजना के तहत अब रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है. नई विकसित भारत रोजगार व आजीविका गारंटी मिशन-ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) योजना के तहत केंद्र और राज्यों के बीच फंड का बंटवारा तय मानकों के आधार पर किया जाएगा. इससे पिछले 7 वर्षों के औसत आवंटन की तुलना में राज्यों को करीब 17,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लाभ मिल सकता है. न्यूज एजेंसी IANS ने SBI रिसर्च की एक रिपोर्ट के हवाले से इसकी जानकारी दी है.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर डॉ. सौम्य कांति घोष ने बताया कि अगर केवल केंद्र के हिस्से का मूल्यांकन 7 तय मानकों के आधार पर किया जाए तो ज्यादातर राज्यों को फायदा होगा. उन्होंने कहा कि इस अनुमान के तहत राज्यों को पिछले 7 वर्षों के औसत आवंटन से लगभग 17,000 करोड़ रुपये ज्यादा मिल सकते हैं. रिपोर्ट में एक काल्पनिक (हाइपोथेटिकल) स्थिति बनाई गई है, जिसमें फंड बांटने के लिए समानता और काम करने की क्षमता, दोनों को बराबर महत्व दिया गया है.
इस व्यवस्था के 2 मुख्य आधार बताए गए हैं. पहला, समानता यानी उन राज्यों को ज्यादा मदद देना, जहां जरूरत ज्यादा है. ग्रामीण आबादी अधिक है और प्रशासनिक जिम्मेदारी बड़ी है, ताकि वहां रोजगार की मांग पूरी हो सके. दूसरा, कामकाज की क्षमता यानी उन राज्यों को प्रोत्साहन देना, जो मिले हुए पैसे से स्थायी रोजगार पैदा करते हैं, टिकाऊ संपत्तियां बनाते हैं और मजदूरी समय पर देते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, इन 7 मानकों को न्याय और कार्यक्षमता के आधार पर बांटा गया है. इसमें मनरेगा (एमजीएनआरईजीए) योजना के तहत वित्त वर्ष 2019 से 2025 तक (साल 2020-21 को छोड़कर) हुए औसत आवंटन की तुलना नए तय मानकों से की गई है. कुल मिलाकर, इस नए तरीके से राज्यों को पिछले 7 वर्षों की तुलना में लगभग 17,000 करोड़ रुपये का फायदा होगा. यानी ज्यादातर राज्य फायदे में रहेंगे. रिपोर्ट के मुताबिक, इस अनुमानित स्थिति में लगभग सभी राज्यों को लाभ मिलेगा. केवल दो राज्यों को बहुत मामूली नुकसान हो सकता है.
तमिलनाडु के मामले में बताया गया कि अगर वित्त वर्ष 2024 में हुए असामान्य बढ़ोतरी (जो वित्त वर्ष 2022 और 2023 के औसत से 29 प्रतिशत ज्यादा थी) को हटा दिया जाए, तो नुकसान लगभग न के बराबर रह जाता है.रिपोर्ट में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा फायदा होगा. इनके बाद बिहार, छत्तीसगढ़ और गुजरात को अधिक लाभ मिलने की संभावना है. अगर पैसों का बंटवारा साफ और तय मानकों के आधार पर किया जाए, तो इससे विकसित और पिछड़े दोनों तरह के राज्यों को फायदा होगा. साथ ही, राज्य अपने 40 प्रतिशत योगदान से इस योजना के नतीजों को और बेहतर बना सकते हैं.
(इनपुट: IANS)
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