26 करोड़ का शेयर बेच महिला ने बनवाया घर, प्रॉफिट पर एक भी रुपया नहीं भरा टैक्स, नियमों की समझ ने ऐसे दिलाया बड़ा फायदा

Section 54F tax exemption: आयकर विभाग ने महिला को 26 करोड़ रुपये के प्रॉफिट पर लाभ देने से इंकार किया था, जिसे महिला ने कोलकाता आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) में चुनौती दी. ITAT ने आयकर अधिनियम की धारा 54F को डिफाइन करते हुए महिला को राहत दिया.

Published date india.com Published: February 16, 2026 12:41 PM IST
Woman 26 crore share tax exemption
नियमों की जानकारी होने और महिला ने अपनी समझदारी से 26 करोड़ रुपये पर टैक्स बचाया.

Income tax on gifted shares: क्या आप जानते हैं कि करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाने के बाद भी आप कानूनी रूप से जीरो टैक्स (Zero tax) का विकल्प चुन सकते हैं? कोलकाता आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने हाल में ही एक ऐसा फैसला सुनाया है जो प्रॉपर्टी और शेयर निवेशकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यह मामला श्रीमती गोयनका से जुड़ा है, जिन्होंने शेयर मार्केट में किसी कंपनी के 36 लाख शेयर करीब 26 करोड़ रुपये में बेचे थे. इस मोटी कमाई के बाद उन्होंने कोलकाता के बालीगंज में एक निर्माणाधीन घर में लगभग 53 करोड़ रुपये का निवेश किया और आयकर अधिनियम की धारा 54F के तहत टैक्स छूट (Tax Exemption) का दावा किया. टैक्स छूट की मांग से आयकर विभाग ने आपत्ति जताई थी, लेकिन ITAT ने विभाग के तर्कों को खारिज करते हुए महिला के पक्ष में फैसला सुनाया. आइये जानते हैं पूरा मामला…

क्या था पूरा मामला?

श्रीमती गोयनका को उनके पति के भाई से उपहार (Gift) के रूप में 36 लाख शेयर मिले थे. उन्होंने इन शेयरों को 26.77 करोड़ रुपये में बेचा. इस पूरी रकम को उन्होंने एक नए घर के निर्माण में निवेश किया और धारा 54F के तहत टैक्स छूट का दावा किया. आयकर विभाग ने उनकी इस छूट को रद्द कर दिया, जिसके बाद गोयनका ने इस फैसले को ट्रिब्यूनल में चुनौती दी.

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आयकर विभाग ने क्यों टैक्स छूट देने से किया इंकार

आयकर अधिकारी (AO) ने तीन आधारों पर टैक्स छूट देने से मना किया था. पहला, विभाग का मानना था कि महिला के पास पहले से दो संपत्तियां थीं, इसलिए वह तीसरी संपत्ति पर छूट नहीं ले सकतीं. दूसरा, घर का निर्माण शेयर बेचने से 5 साल पहले ही शुरू हो गया था। विभाग का तर्क था कि निर्माण शेयर बेचने के बाद शुरू होना चाहिए. तीसरा, विभाग ने कहा कि शेयर बेचने से मिला पैसा सीधे घर बनाने में नहीं लगा, बल्कि फंड कहीं और से आए थे.

ITAT ने क्यों पलटा फैसला?

ITAT ने स्पष्ट किया कि जिस दूसरी संपत्ति (Southern Avenue) की बात आयकर विभाग कर रहा है, उसमें महिला केवल सह-मालिक (Co-owner) थीं. कानून के अनुसार, धारा 54F की पाबंदी तब लागू होगी जब महिला के पास पास पूर्ण स्वामित्व वाला दूसरा घर होता. संयुक्त संपत्ति होना का मालिकाना हक होना आपको टैक्स लाभ से वंचित नहीं कर सकता.

ट्रिब्यूनल ने धारा 54F का विस्तार करते हुए कहा कि नियम यह नहीं है कि घर का निर्माण शेयर बेचने के बाद ही शुरू होना चाहिए. नियम सिर्फ यह है कि घर का निर्माण शेयर बेचने की तारीख से 3 साल के भीतर पूरा हो जाना चाहिए. कोर्ट ने कर्नाटक और पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यह जरूरी नहीं है कि आप वही नोट घर बनाने में लगाएं जो आपने शेयर बेचकर कमाए हैं. यदि आपने घर पर कुल निवेश शेयर से हुए मुनाफे से ज्यादा किया है, तो आप छूट के हकदार हैं.

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वहीं, आयकर विभाग ने इसे कलरबल डिवाइस (टैक्स चोरी का हथकंडा) कहा था क्योंकि शेयर पति के भाई से गिफ्ट में मिले थे. हालांकि, कोर्ट ने पाया कि चूंकि गिफ्ट पति के भाई से था, न कि पति से, इसलिए क्लबिंग के नियम यहां लागू नहीं होते. क्लबिंग ऑफ इनकम का अर्थ होता है कि पति-पति की आय में नाबालिग बच्चे की आय जोड़कर टैक्स लगाना.

ITAT कोलकाता का यह फैसला टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी राहत है. यह साबित करता है कि नियमों की सही समझ और सही समय पर किया गया निवेश आपको भारी-भरकम टैक्स से बचा सकता है. कोर्ट ने माना कि धारा 54F एक कल्याणकारी प्रावधान है और इसका लाभ तकनीकी आधार पर नहीं छीना जाना चाहिए.

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