नई दिल्ली। एक अनोखे मामले में बेंगलुरु के एक मानव संसाधन प्रबंधक ने सुप्रीम का दरवाजा खटखटाकर यूआईडीएआई को यह निर्देश देने की मांग की कि वह उन्हें उनके दिवंगत पिता का बायोमीट्रिक डाटा सौंपे. यह डाटा आधार कार्ड बनाने के लिए लिया गया था. संतोष मिन बी ने कहा कि वह बायोमीट्रिक विवरण चाहते हैं क्योंकि उनके पिता की मृत्यु के मद्देनजर इसकी यूआईडीएआई के लिये कोई उपयोगिता नहीं होगी और इसका दुरुपयोग हो सकता है. Also Read - केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- डिजिटल मीडिया ज़हर है, इस पर नियंत्रण हो

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संतोष एक आयुर्वेदिक क्लिनिक में काम करते हैं. उन्होंने अदालत से कहा कि उनके पिता की बेंगलूरू में प्रोविडेंट फंड कार्यालय में जीवन प्रमाण पत्र दाखिल करने के दौरान अपमानित होने के बाद मृत्यु हो गई थी. उनके पिता का वृद्धावस्था और आंखों की मोतियाबिंद की सर्जरी के कारण बायोमीट्रिक प्रमाणन नहीं हो पाया था, जिसकी वजह से उन्होंने अपमानित महसूस किया था. Also Read - प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए पर्याप्त नियमन मौजूद, डिजिटल मीडिया का नियमन पहले हो: केंद्र

आधार विवाद पर बोले नीलेकणि- 'बदनाम करने के लिए चल रही है मुहिम'

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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने संतोष को मामले में अपनी दलील रखने के लिए दो मिनट का वक्त दिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि आधार योजना अघोषित आपातकाल की तरह है. उन्होंने कहा कि यह अदालत भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को मेरे पिता का बायोमीट्रिक प्रिंटेड रूप में सौंपने का निर्देश दे सकती है ताकि मैं इसे भावी पीढ़ी के लिये रख सकूं.

पीठ में न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण भी शामिल हैं. संतोष आधार योजना को समाप्त करने की मांग की. पीठ ने उनकी दलीलों को रिकार्ड में रख लिया और मामले पर अगली सुनवाई की तारीख 20 मार्च निर्धारित कर दी.

आधार डिटेल हुई थी लीक

आधार पर विवाद का ये पहला मामला नहीं है. एक मामले में खुद को खरीदार बताने वाली एक पत्रकार ने गुमनाम विक्रेता से व्हाटसऐप पर कोई सेवा खरीदी जिसके तहत उसे आधार संख्या तक बिना किसी प्रतिबंध के पहुंच मिल गई. इस मामले में एफआईआर भी हुई थी जिस पर खूब हो हल्ला मचा था. इस मामले पर भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणि ने कहा था कि राई का पहाड़ बनाया जा रहा है क्योंकि आधार बहु-स्तरीय सुरक्षा के साथ निर्मित किया गया है और उस तक पहुंच इतनी आसान नहीं है. नंदन नीलेकणि का कहना था कि आधार को बदनाम करने के लिए ‘योजनाबद्ध तरीके से अभियान’ चलाया जा रहा है.