नई दिल्लीः पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से मौत का मातम छाया हुआ है. इस वायरस ने अब तक विश्व भर में दो लाख से अधिक लोगों की जान ले ली है. हर देश इस समय कोरोना वायरस की वैक्सीन खोजने में लगा हुआ है. इस बीच ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एक खुशखबरी आई है. यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक वैक्सीन पर काम कर रहे हैं और यह दावा किया गया है कि वे लोग वैक्सीन के बहुत करीब है. अब वैक्सीन का मनुष्यों पर भी ट्रायल शुरू हो गया है. Also Read - यूपी सरकार ने शॉपिंग मॉल खोलने को लेकर जारी किए दिशानिर्देश, मास्क के बिना अनुमति नहीं

टीके बनाने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने रविवार को कहा कि यदि ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कोविड-19 टीके का ह्यूमन ट्रायल सक्सेस रहता है तो कंपनी जून तक उत्पादन को शरू कर सकता है ताकि देश को जल्दी वैक्सीन मिल सके. कंपनी ने कहा कि यदि यह संभव हो सका तो भारत में अक्टूबर माह तक वैक्सीन आ जाएगी. Also Read - Goggle Mask: कोरोना को देने मात, लखनऊ दंपति ने बनाया 'गॉगल मास्क'

पुणे स्थित कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया उन सात वैश्विक कंपनियों में शामिल है, जिसके साथ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने टीके के उत्पादन के लिये साझेदारी की है. Also Read - सन फार्मा ने शुरू किया इस दवा के दूसरे चरण का क्लिनिकल ट्रायल, 210 मरीजों पर होगा टेस्ट 

कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने कहा, ‘‘हमारी टीम ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के डॉ हिल के साथ मिलकर करीबी से काम कर रही है. हमें अगले दो से तीन सप्ताह में इसका उत्पादन शुरू कर देने की उम्मीद है. पहले छह महीने उत्पादन की क्षमता प्रति माह पचास लाख खुराक की रहेगी. इसके बाद हमें उत्पादन बढ़ाकर प्रति माह एक करोड़ खुराक कर लेने की उम्मीद है.’’

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया पहले भी ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के साथ मलेरिया टीका परियोजना पर काम कर चुकी है. पूनावाला ने कहा, ‘‘हमें कोविड-19 टीके के सितंबर-अक्टूबर तक बाजार में आ जाने की उम्मीद है, बशर्ते कि टीके का परीक्षण आवश्यक सुरक्षा व पर्याप्त प्रभाव के साथ सफल हो जाये. हम अगले दो से तीन सप्ताह में इस टीके का परीक्षण भारत में शुरू कर देंगे.’’

कंपनी ने कहा कि भारत में इस टीके का परीक्षण शुरू करने के लिये आवश्यक मंजूरियां लेने की प्रक्रिया चल रही है. पूनावाला ने कहा, ‘‘मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए हमने इस प्रयास को खुद से वित्तपोषित किया है. हमें उम्मीद है कि उत्पादन बढ़ाने में हमें अन्य साझेदारों से भी सहयोग मिलेगा.’’

उन्होंने कहा कि टीके का विनिर्माण पुणे स्थित संयंत्र में किया जायेगा. कोविड-19 के टीके बनाने के लिये यदि अलग से संयंत्र बनाया जाये तो इसमें करीब दो से तीन साल लग जायेंगे.

उन्होंने कहा कि कंपनी इस टीके का पेटेंट नहीं करायेगी और इसे न सिर्फ भारत बल्कि दुनिया भर की कंपनियों के लिये उत्पादन व बिक्री करने के लिये उपलब्ध करायेगी. उन्होंने कहा कि जो कोई भी इसका टीका विकसित करेगा, उसे टीके के विनिर्माण के लिये कई साझेदारों की जरूरत पड़ेगी.