Also Read - BJP MP नंद कुमार सिंह चौहान का COVID-19 के संक्रमण के चलते मेदांता अस्‍पताल में निधन

Also Read - Delhi: बहन के पीछे पड़े मनचलों की हरकत का विरोध करने पर भाई को चाकुओं से गोदा, लड़की ने बयां की दास्‍तां

नई दिल्ली, 22 मार्च | राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को होने वाले पाकिस्तान दिवस समारोह से पहले कार्यक्रम के संचालक हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने रविवार को कहा कि जम्मू एवं कश्मीर मसले पर भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता को हुर्रियत का पूरा समर्थन है। पाकिस्तान उच्चायोग में आयोजित होने वाले पाकिस्तान दिवस समारोह में हिस्सा लेने के लिए रविवार को दिल्ली पहुंचे मीरवाइज हुर्रियत के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। यह प्रतिनिधिमंडल भारत में नियुक्त पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित से भी मुलाकात करेगा।  यह भी पढ़ें– सैयद गिलानी ने पाकिस्तानी उच्चायुक्त से मुलाकात की Also Read - Delhi: फैक्‍ट्री में लगी भयंकर आग को दमकल की 28 गाड़ियां बुझाने में जुटीं, चपेट में आए एक व्‍यक्ति की मौत

कट्टरपंथी सैयद अली गिलनी को भी इस समारोह में हिस्सा लेने के लिए निमंत्रित किया गया है। दिल्ली पहुंचने के बाद मीरवाइज ने पत्रकारों से कहा, “हुर्रियत भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता को अपना पूरा समर्थन देता है। हमारा मानना है कि दोनों देशों के बीच बातचीत बेहद अहम है, लेकिन इस वार्ता में जम्मू एवं कश्मीर के लोगों को शामिल करना भी उतना ही अहम है। और जम्मू एवं कश्मीर के लोगों से मेरा आशय मौजूदा नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के बाशिंदों से है।”

हुर्रियत ने इससे पहले एक वक्तव्य जारी कर कहा था, “हुर्रियत का प्रतिनिधिमंडल दल भारत के साथ वार्ता शुरू करने को लेकर पाकिस्तान के साथ विस्तार से चर्चा करेगा। इसके अलावा कश्मीर विवाद से जुड़े अन्य कई राजनीतिक मसलों पर भी बातचीत की जाएगी।” पाकिस्तान के उच्चायुक्त बासित ने इससे पहले गिलानी से मुलाकात की और इसी महीने इससे पहले इस्लामाबाद में भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर की पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज अहमद चौधरी के बीच हुई बातचीत से अवगत कराया।

पाकिस्तान द्वारा कश्मीर मसले पर बातचीत में हुर्रियत को शामिल करने पर भारत ने शुक्रवार को कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा था कि वह हमेशा कश्मीर सहित सभी द्विपक्षीय मुद्दों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए तैयार है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत बिल्कुल नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “क्या भारत ने दोनों देशों के बीच किसी मुद्दे में तीसरे पक्ष को शामिल करने की अनुमति दी या ऐसी चेष्टा व्यक्त की?”