चेन्नई: कैंसर से ग्रस्त अपनी पत्नी मंजुला का इलाज कराने के लिए साइकिल पर 130 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद अरिवजगन को व्यापक मीडिया कवरेज तो मिला, लेकिन उसे सहायता नहीं मिली. वह अभी भी तमिलनाडु सरकार की मदद का इंतजार कर रहा है. कंस्ट्रकक्शन मजदूर अरिवजगन ने बताया, “मीडिया में खबर आने के बाद, स्थानीय पुलिस अधिकारी आकर हमसे मिले और आश्वासन दिया कि जब भी जरूरत होगी, वे एम्बुलेंस की व्यवस्था करेंगे. उन्होंने मुझसे अपनी पत्नी को दोबारा साइकिल पर पुडुचेरी न ले जाने का अनुरोध किया है.” Also Read - PM Kisan Samman Nidhi Yojana में हुआ 110 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश, ऐसे चल रहा था खेल

उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी मंजुला को फिर से दर्द की शिकायत है. अरिवजगन ने कहा कि उन्होंने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में दंपति के शामिल होने के बारे में नहीं सुना है. पुडुचेरी में जेआईपीएमईआर के एक डॉक्टर ने उन्हें अपनी पत्नी के स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ करने के लिए फोन किया था. एक अच्छे दयालु व्यक्ति ने कुछ पैसे हमारे बैंक खाते में ट्रांसफर भी किए थे. उन्होंने कहा, “लॉकडाउन के साथ, निर्माण कार्य बंद हो गया है और इसलिए मेरी कमाई भी बंद हो गई है.” Also Read - OMG! फोन की बैटरी हुई डेड, चार्जिंग पर लगाकर बात कर रही थी महिला, कॉल कटते ही फट गया मोबाइल...

अरविजगन तब चर्चा में आए जब 30 मार्च को अपनी 60 वर्षीय पत्नी मंजुला के साथ वह अपने गांव कुंबकोणम से साइकिल से पुडुचेरी के जेआईपहएमईआर अस्पताल के लिए कीमोथेरेपी कराने जा रहे थे. लॉकडाउन के कारण, तमिलनाडु और पुडुचेरी के बीच बसें नहीं चल रही थीं. सिर्फ एक ‘धोती’ पहने हुए अरिवजगन ने अपनी पत्नी को खुद से एक तौलिया से बांधकर साइकिल पर बैठाया हुआ था, ताकि वह रास्ते में गिरे न. Also Read - Amitabh Bachchan Health Update: अमिताभ बच्चन के 26 स्टाफ निगेटिव, बिग बी की तबीयत है अब ऐसी

उन्होंने पहले आईएएनएस को बताया था, “हम सुबह 4.45 बजे निकले और रात 10.15 बजे जेआईपीएमआईआर. रास्ते में, हमने चाय पी और एक तालाब के पास दो घंटे के लिए सो गए.” जेआईपीएमआईआर के डॉक्टर्स और अन्य लोग उसके साइकलिंग एडवेंचर पर चकित थे. उन्होंने उसकी तारीफ की. अरिवजगन ने आईएएनएस को बताया, “उन्होंने मेरी पत्नी का इलाज किया और मेरी मदद करने के लिए पैसों का इंतजाम किया. उन्होंने एक महीने के लिए दवाइयां भी दी और हमें वापस छोड़ने के लिए एम्बुलेंस के लिए लगभग 6,300 रुपये का भुगतान किया.”