नई दिल्ली: मीटू अभियान से यौन शोषण से आरोपों से घिरे विदेश राज्‍यमंत्री एमजे अकबर पर बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह ने पहली बार चुप्‍पी तोड़ी है. बीजेपी अध्यक्ष शाह ने कहा कि वह विदेश राज्यमंत्री एम.जे. अकबर पर टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि केंद्रीय मंत्री के खिलाफ लगे आरोपों की जांच की जरूरत है. अकबर कई महिला पत्रकारों के यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे हैं. शाह ने शुक्रवार रात ईटीवी को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “किसी चीज पर यूं ही टिप्पणी करना बहुत मुश्किल है, जो एक वेबसाइट पर छपा हो. कोई भी एक वेबसाइट पर कुछ भी डाल सकता है. इसलिए इसकी जांच की जरूरत है. चाहे वह सच हो या झूठ या फिर इस तरह की घटना हुई हो या नहीं.” Also Read - Covid-19 Fight: कोरोना से लड़ने के लिए केंद्र सरकार का एक और बड़ा कदम, गठित हुईं 11 टीमें

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बीजेपी प्रेसिडेंट ने कहा, “यह देखना होगा कि क्या यह वही व्यक्ति है, जिसने आरोप लगाए हैं और जिसने इसे सोशल मीडिया पर डाला है. इन सभी चीजों को देखा जाएगा. और एक बार ऐसा करने के बाद हम इसके बारे में जरूर सोचेंगे (अकबर पर कार्रवाई).” Also Read - MP में BJP सरकार बनने पर दिग्विजय सिंह ने लिखा खुला खत, ज्योतिरादित्य सिंधिया पर की लंबी बात

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एक दर्जन से ज्यादा महिला पत्रकारों ने अकबर पर उनके पत्रकारिता करियर के दौरान विभिन्न मौकों पर यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं. अकबर ने उस दौरान कई अखबार शुरू किए थे या उनके संपादक रहे थे. अकबर पूर्व पत्रकार हैं और पूर्व में कई अखबारों के संपादक रह चुके हैं. उन पर आरोप हैं अखबारों में शीर्ष पदों पर रहते हुए कई महिला सहकर्मियों का यौन शोषण किया.

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दिल्ली में पत्रकारों का प्रदर्शन, कहा कार्यस्थल पर यौन शोषण स्वीकार्य नहीं
देश में ‘मी टू’ अभियान के जोर पकड़ने के साथ शनिवार को पत्रकारों के एक समूह ने यौन शोषण की घटनाएं उजागर करने वाली अपनी महिला सहकर्मियों के साथ एकजटुता दिखाते हुए यहां विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने साथ ही कार्यस्थल पर गरिमा सुनिश्चित करने के लिए यौन शोषण रोकथाम अधिनियम के उचित कार्यान्वयन की मांग को लेकर एक प्रस्ताव भी पारित किया. कई महिला पत्रकारों द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों से घिरे केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर को पद से हटाने की भी मांग की. पत्रकार हाथों में तख्तियां लिए हुए थे जिसपर लिखा था कि कार्यस्थल पर यौन शोषण स्वीकार्य नहीं है और जवाबदेही शीर्ष से शुरू होती है.