चंडीगढ़/ नई दिल्‍ली: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिलने और आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए शुक्रवार सुबह दिल्ली पहुंच गए हैं. बीजेपी के कार्यकारी अध्‍यक्ष जेपी नड्डा समेत पार्टी के कुछ सीनियर नेताओं के साथ खट्टर की मीटिंग होने जा रही है. इस बीच खबर है कि पांच निर्दलीय विधायक बीजेपी को सरकार बनाने के लिए अपना समर्थन देने को तैयार हैं. खट्टर ने यहांं न‍िर्दलीय व‍िधायकों से मुलाकात की है. सीएम खट्टर ने कहा,  मैं आशावादी हूं और हम हरियाणा में सरकार बनाने जा रहे हैं.

ताजा खबरों के मुताब‍िक पांच व‍िधायक बीजेपी को समर्थन देने के ल‍िए द‍िल्‍ली पहुंच चुके हैं.  सीएम खट्टर ने इन व‍िधायकों से मुलाकात हर‍ियाणा भवन में की है. अभी और कुछ व‍िधायक बीजेपी के पक्ष में आने की संभावना है.

ये व‍िधायक पक्ष में

1. गोपाल कांडा
2. रणजीत सिंह
3. राकेश दौलताबाद
4. रणधीर गोलन
5. बलराज कुंडू

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सुबह खट्टर हेलि‍कॉप्टर से दिल्ली के लिए रवाना हुए. उन्होंने चंडीगढ़ से अपने सरकारी निवास के पास से ही उड़ान भरी. खट्टर दिल्‍ली में हरियाणा भवन में पहुंच चुके हैं. वह दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भेंट करेंगे और राज्य में सरकार बनाने की संभावनाओं के बारे में चर्चा करेंगे.

पार्टी के पास विकल्प है कि वह सिर्फ स्वतंत्र विधायकों के समर्थन से सरकार बनाए या फिर जजपा से संपर्क करे या दोनों विकल्पों पर विचार करे. सूत्रों ने बताया कि खट्टर की दिल्ली यात्रा के दौरान इस सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा.

बता दें राज्य विधानसभा चुनाव में किसी एक पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, हालांकि भाजपा 40 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. चुनाव नतीजे आने के बाद भारतीय जनता पार्टी अगली सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े से छह सीट पीछे रह गई.

चुनाव में कांग्रेस को 31 सीटों पर जीत मिली है, जबकि जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) को 10 और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) और हरियाणा लोकहित पार्टी (एचएलपी) को एक-एक सीट मिली हैं. स्वतंत्र उम्मीदवारों ने 7 सीटों पर जीत दर्ज की है.

राज्य में चुनाव नतीजे भाजपा के लिए निराशाजनक इसलिए रहे क्योंकि लोकसभा चुनाव 2019 में पार्टी को राज्य की सभी 10 सीटों पर जीत मिली थी और उसे इस बार 75 से अधिक सीटों पर जीत की उम्मीद थी. हालांकि चुनाव लड़ने वाले पार्टी के 10 मंत्रियों में आठ को हार का सामना करना पड़ा.