नई दिल्ली: राफेल विमान निर्माता कंपनी दसॉल्ट के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से झूठ बोलेने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैंने जो कहा वह सच है. मैं जूठ नहीं बोलता. ट्रैपियर से जब पूछा गया कि राहुल गांधी ने दसॉल्ट के अनिल अंबानी ग्रुप के साथ समझौते को लेकर उनपर झूठ बोलने का आरोप लगाया है तो एरिक ट्रैपियर ने कहा, मैं झूठ नहीं बोल रहा, मैंने पहले जो बयान दिए है वह सच हैं. एक सीईओ के पद पर रहते हुए आप झूठ नहीं बोल सकते. Also Read - राहुल गांधी का 'मन की बात' पर निशाना, कहा- पीएम मोदी किसानों की बात करते तो बेहतर होता

बता दें कि राहुल गांधी ने दो नवंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट एविएशन के सीईओ ने कहा था कि अनिल अंबानी की कंपनी को ऑफसेट पार्टनर इसलिए बनाया गया क्योंकि उनके पास जमीन थी. कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया था कि दसॉल्ट ने 284 करोड़ रुपये अंबानी की कंपनी को दिए और अंबानी ने उसी पैसे से जमीन खरीदी. राहुल ने तंज कसते हुए कहा था कि दसॉल्ट केवल मोदी को बचा रही है और जांच होगी तो पीएम नहीं टिक पाएंगे. Also Read - भाजपा-संघ की सोच के अनुसार दलितों-आदिवासियों नहीं मिलनी चाहिए शिक्षा: राहुल गांधी

दसॉल्ट के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कहा कि राहुल गांधी की टिप्पणी ने उन्हें निराश किया है. उन्होंने कहा, कांग्रेस पार्टी के साथ हमारा लंबा अनुभव रहा है. भारत के साथ हमारी पहली डील 1953 में हुई जब कांग्रेसी पंडित जवाहर लाल नेहरु प्रधानमंत्री थे. हम भारत के साथ काम कर रहे हैं न कि किसी पार्टी के साथ. हम भारत सरकार और सेना को रणनीतिक सामान मुहैया करा रहे हैं. यह बात सबसे महत्वपूर्ण है. Also Read - किसान आंदोलन पर राहुल गांधी ने कहा- जब तक कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते, तब तक जारी रहेगी लड़ाई

यह पूछे जाने पर कि फाइटर प्लेन बनाने का अनुभव नहीं होने के बाद भी उनकी कंपनी ने रिलायंस ऑफसेट पार्टनर क्यों चुना. सीईओ ने कहा कि दसॉल्ट ने जो पैसे निवेश किए हैं वह रिलायंस के खाते में नहीं जा रहा बल्कि यह रिलायंस और दसॉल्ट के जॉइंट वेंचर में जाएगा. जहां तक इस डील की बात है, मेरे पास इंजीनियर्स और वर्कर्स हैं, जो इसे लेकर काफी आगे हैं. वहीं दूसरी तरफ, हमारे पास रिलायंस जैसी भारतीय कंपनी है, जो इस जॉइंट वेंचर में पैसा लगा रही है और वह ये अपने देश को विकसित करने के लिए कर रहे हैं. इसलिए कंपनी यह भी जान सकेगी कि एयरक्राफ्ट कैसे बनाए जाते हैं.

दसॉल्ट के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने कहा, हम रिलायंस में पैसा नहीं लगा रहे हैं. निवेश का पैसा रिलायंस और दसॉल्ट के जॉइंट वेंचर में जाएगा. उन्होंने बताया कि सरकारी नियमों के मुताबिक दसॉल्ट 49 प्रतिशत और रिलायंस 51 प्रतिशत पैसा लगाएगा. उन्होंने कहा कि हमें एक साथ 800 करोड़ रुपये 50:50 के अनुपात में लगाने हैं. कुछ समय के लिए काम शुरू करने और कर्मचारियों को भुगतान करने के लिए हमने पहले ही 40 करोड़ रुपये लगाए हैं, लेकिन यह 800 करोड़ रुपये तक बढ़ेगा. इसका मतलब है कि दसॉल्ट को आने वाले पांच साल में 400 करोड़ रुपये लगाने हैं.