नई दिल्ली। पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की याद में आज दिल्ली में सर्वदलीय प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया. इस मौके पर पीएम मोदी, एलके आडवाणी, संघ प्रमुख मोहन भागवत सहित कई बड़े नेताओं ने अटलजी को याद किया. आडवाणी ने उस दौर को याद किया जब वह और अटल एक साथ वक्त बिताया करते थे. क्या क्या कहा आडवाणी ने पढ़ें-

ऐसी कल्पना नहीं की थी….

आज ऐसी सभा को संबोधित करूंगा, ऐसी कभी कल्पना नहीं की थी. मुझे इसका पहला पहली लक्षण तो यही ख्याल में आता है कि कोई ऐसी सभी जिसमें अटलजी उपस्थित ना हो, नहीं सोचा था कि ऐसी सभा संबोधित करने पड़ेगी. अटलजी कहते थे कभी कभी कि मैं कितने दिन रहूंगा, तब मन में एक तकलीफ होती थी. मैंने जब अपने जीवन की पुस्तक लिखी थी, उसमें अटलजी का जिक्र था. इसीलिए जब उसका विमोचन हुआ और उसमें अटलजी नहीं आए तो मुझे बहुत कष्ट हुआ.

मैं उसका जिक्र करता था कि पुस्तक लिखी, विमोचन हुआ, लेकिन जब विमोचन हुआ तो अटलजी उपस्थित नहीं थे. आज भी वह उपस्थित नहीं हैं. आज की सभा में अटलजी को जानने वाले, काम करने वाले कार्यकर्ता नहीं है. लेकिन कई दलों के नेता मौजूद हैं जिनका जनसंघ या बीजेपी से संबंध नहीं है. वह भी यहां उपस्थित हैं, इसका मुझे बहुत आनंद है.

65 साल तक रही थी दोस्ती

मेरी मित्रता अटलजी से 65 सालों से रही है. साथ साथ घूमते थे, पुस्तके साथ साथ पढ़ते थे. कभी कोई अटलजी के परिचय का कोई साक्षात्कार करेगा तो जानेगा कि वह भोजन अच्छा बनाते थे. उनके साथ साथ रहते हुए मुझे इसका बहुत अनुभव हुआ. अटलजी ही भोजन पकाकर खिलाते थे. चाहे वह खिचड़ी ही सही. इसका जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि एक दिन मैंने अपनी किताब लिखी, मैंने सार्वजनिक रूप से विमोचन किया और अटलजी उसमें नहीं आए तो मुझे बहुत दुख हुआ. आज भी अटलजी की अनुपस्थिति में बोल रहा हूं तो बहुत दुख होता है.

अटलजी की याद में सर्वदलीय प्रार्थना सभा, जुटे सभी दलों के दिग्गज नेता

मैंने अटलजी से बहुत सीखा है. अटलजी को नजदीक से देखने का मौका मिला. उनसे बहुत कुछ पाया. इसीलिए दुख होता है कि वह हमसे अलग हो गए. इतना ही कह सकता हूं कि अटलजी ने जो कुछ हमें सिखाया, बताया, उसे जीवन में उतारकर दिखाएं. हमने जो संस्कार आरएसएस से पाए हैं, उन संस्कारों को कार्यान्वित करने का सौभाग्य होगा. मैं उनके बताए मार्ग पर जीवन पर चल पाऊं. सब साथियों को वहीं दे पाने में समर्थ हो पाऊं, यहीं शक्ति भगवान मुझे दे.