नई दिल्‍ली. आयकर विभाग ने 3200 करोड़ रुपये के टीडीएस घोटाले का खुलासा किया है. इस मामले में 447 कंपनियों ने अपने कर्मचरियों के वेतन से टीडीएस के पैसे काट लिए, लेकिन उसे आयकर विभाग में जमा नहीं किया, बल्कि उसे अपने कारोबार को बढ़ाने में लगा दिया. आयकर विभाग के टीडीएस विंग ने इन कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है, साथ ही कुछ मामलों में वारंट भी जारी किए गए है.Also Read - Gratuity News Rules 2021: नए कानून के बाद बदल गया ग्रेच्युटी का नियम, अब किसे और कब मिलेगा?

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, कर्मचारियों के वेतन से टीडीएस काटकर उसे जमा नहीं करने पर आयकर अधिनियम के तहत, तीन महीने के सश्रम कारावास की सजा, जबकि अधिकतम सात साल की सजा का प्रावधान है. ऐसे मामलों में अभियोजन की धारा 276 बी के तहत कार्रवाई शुरू की जाती है. वहीं आयकर विभाग के सूत्रों के इसे घोटाला कहने से इनकार किया है. विभाग की मानें तो ये सिर्फ वेरिफिकेशन सर्वे का विवरण है, जो अप्रैल 2017 से मार्च 2018 के बीच किया गया है. इस तरह का सर्वे हर साल किया जाता है. ये वैसा ही मामला है, जिसमें कर्मचारी सैलरी से टीडीएस तो घटा लेते हैं, लेकिन वक्‍त पर टैक्‍स जमा नहीं करते. Also Read - बिहार: अधिकारियों, कर्मचारियों ने फिर ली शराब नहीं पीने की शपथ, CM नीतीश ने प्रचार रथ को किया रवाना

आयकर विभाग ने 3,500 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्तियां की जब्त
आयकर विभाग ने जनवरी माह में 3,500 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की 900 से अधिक बेनामी संपत्तियां जब्त की. इसमें फ्लैट, दुकानें, आभूषण और वाहन इत्यादि शामिल थे. आयकर विभाग ने एक बयान में कहा कि उसने बेनामी संपत्ति लेन-देन रोकथाम कानून के तहत कार्रवाई तेज कर दी है. उल्लेखनीय है कि यह कानून एक नवंबर 2016 से प्रभावी हुआ है. इस कानून के तहत पहले चल-अचल किसी किस्म की बेनामी संपत्तियों को फौरी तौर पर कुर्क करने और फिर उनको पक्के तौर पर जब्त करने की कार्रवाई करने क प्रावधान है. Also Read - Income Tax Rebate: किराए के घर में रहने पर मिलती है इनकम टैक्स छूट, यहां चेक करें डिटेल्स