नई दिल्ली: 1999 करगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाने के साथ ही भारतीय वायुसेना में तीन दशक से अधिक समय तक सेवा में रहने वाले लड़ाकू विमान मिग-27 विमान शुक्रवार को विदाई दे दी गई. इस फाइटर प्‍लेन की आखिरी उड़ान पर वाटर कैनन से सलामी दी गई. फाइटर प्‍लेन मिग-27 को सर्विस से रिटायर करने के लिए राजस्‍थान के शहर जोधपुर में स्थित एयरफोर्स बेस पर एक भव्‍य कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

एयरफोर्स ने कहा कि भारतीय वायु सेना के बेड़े में 1985 में शामिल किया गया, यह अत्यंत सक्षम लड़ाकू विमान ज़मीनी हमले की क्षमता का आधार रहा है. वायु सेना के सभी प्रमुख ऑपरेशन्स में भाग लेने के साथ मिग-27 नें 1999 के कारगिल युद्ध में भी एक अभूतपूर्व भूमिका निभाई थी.

रक्षा मंत्रालय ने कहा, ”इस बेड़े ने ऐतिहासिक करगिल युद्ध के दौरान गौरव हासिल किया था, जब इसने दुश्मन के ठिकानों पर राकेट और बम सटीकता से गिराए थे. इस बेड़े ने आपरेशन पराक्रम में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी.

डिफेंस मिनिस्‍ट्री ने कहा, स्विंग..विंग फ्लीट का उन्नत संस्करण 2006 से वायुसेना के स्ट्राइक फ्लीट का गौरव रहा है. अन्य सभी संस्करण जैसे मिग-23 बीएन और मिग- 23 एमएफ और विशुद्ध मिग 27 वायुसेना से पहले ही रिटायर हो चुके हैं.

अधिकारियों ने बताया कि स्विंग विंग लड़ाकू विमान वायुसेना में कई दशकों तक ‘ग्राउंड अटैक’ बेड़े में अहम भूमिका में रहे हैं.

नम्बर 29 स्क्वाड्रन एयरफोर्स में मिग 27 अपग्रेड विमानों को संचालित करने वाली एकमात्र इकाई है. उन्नत संस्करण ने कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में हिस्सा लिया है.

– स्क्वाड्रन की स्थापना 10 मार्च 1958 को वायुसेना स्टेशन हलवारा में ओरागन (तूफानी) विमान से की गई थी.
– वर्षों तक स्क्वाड्रन को कई तरह के विमानों से लैस किया गया, जिसमें मिग 21 टाइप 77, मिग 21 टाइप 96, मिग 27 एमएल और मिग 27 अपग्रेड शामिल हैं.’

– मिग 27 विमानों को सेवा से रिटायर करने के लिए जोधपुर एयरफोर्स बेस पर आज 27 दिसंबर को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया
– इंडियन एयरफोर्स ने मिग 27 की शुक्रवार को अंतिम उड़ान के बारे में ट्वीट किया है.