नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट्स भावना कान्त, अवनि चतुर्वेदी और मोहना सिंह पश्चिम बंगाल के कलाईकुंडा एयरफोर्स स्टेशन में अपनी ट्रेनिंग के फाइनल स्टेज से गुजर रही हैं. इन तीनों फाइटर पायलट्स को कलाईकुंडा में एडवांस्ड जेट ट्रेनर ‘इंडियन एयरफोर्स हॉक एमके 132’ पर ट्रेनिंग दी जा रही है, जिसमें इन्हें तरह-तरह की रणनीति सिखाई जा रही है.

वायुसेना के एक वरिष्ठ फाइटर पायलट ने बताया कि इस तरह के ट्रेनिंग सेशन से पायलटों को युद्ध और इमरजेंसी के केस में नजदीकी एयरफील्ड पता कर प्लेन लैंड कराने में मदद मिलती है. इससे पायलट लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे जैसे रोड पर भी फाइटर प्लेन लैंड करना सिखते हैं. अगर युद्ध में दुश्मन एयरबेस और उसके रनवे को तबाह कर देता है तो एक्सप्रेस वे पर लैंडिग कराई जा सकती है.

कलाईकुंडा एयरबेस से ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भावना कान्त, अवनि चतुर्वेदी और मोहना सिंह 31 अक्टूबर, 2017 तक वायुसेना में फाइटर पायलट्स के तौर पर काम करना शुरू कर देंगी. हैदराबाद के करीब एयरफोर्स एकेडमी डुंडीगल में इन तीनों ने पहले ही अपनी बेसिक और एडवांस्ड ट्रेनिंग पूरी कर ली थी.

भारत की पहली तीन महिला फाइटर पायलटों के बारे में जानिए-
बिहार के दरभंगा की रहने वाली भावना कान्त के पिता इंजीनियर हैं. भावना को बैडमिंटन और बॉलीवॉल जैसे खेलों के साथ फोटोग्राफी का भी शौक है. उनका कहना है कि वो खुले आसमान में परिंदों की तरह उड़ना चाहती हैं इसलिए उन्होंने वायुसेना में आने का फैसला किया. 

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अवनि चतुर्वेदी मध्यप्रदेश के सतना से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता भी इंजीनियर हैं और माता हाउस वाइफ. अवनि को वायलिन बजाना, टेबल टेनिस खेलना और पेंटिंग करना भी पसंद है. अवनि का कहना है कि एकबार उन्हें स्कूल के फ्लाइंग क्लब में उड़ने का मौका मिला था तभी से उन्होंने तय कर लिया कि वायुसेना ज्वॉइन करना है.

मोहना सिंह झुंझनू राजस्थान की रहने वाली हैं. उनके पिता वायुसेना में ही थे. मोहना को संगीत और पढ़ाई के साथ घूमने का भी काफी शौक है. उनका कहना है कि अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने वायुसेना ज्वॉइन किया और देश सेवा करने का फैसला किया.