नई दिल्ली: दिल्ली सहित पूरे देश में कोरोना वायरस (coronavirus) के मामले लगातार तेजी से फैल रहे हैं. राज्य सरकार और केंद्र सरकार लगाता इससे निपटने के लिए प्रयास कर रही है. कोरोना के बढ़ते मामलो के बीच रविवार को गृहमंत्राी अमित शाह (Amit Shah) ने दिल्ली में सीएम केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal), केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन और दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित आला अधिकारियों के साथ बैठक की. बैठक में कोरोना से निपटने और उसके ताजा हालात के बारे में विस्तार से चर्चा की गई. केंद्र सरकार की तरफ से जानकारी दी गई कि अब कोरोना के रोकने के लिए टेस्टिंग की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी. कोरोनावायरस की टेस्टिंग के लिए इस समय आईसीएमआर और एम्स ने मिलकर काम कर रहे हैं. दोनों ने ही तेज गति से टेस्टिंग के नतीजे पाने के लिए एक खास तरह के किट का प्रयोग करने का निर्णय लिया है. Also Read - USA-China Trade War: ट्रंप ने चीन के साथ दूसरे चरण के व्यापार सौदे की संभावना को किया खारिज , कही ये बड़ी बात

आईसीएमआर (ICMR) और एम्स (AIIMS) दोनों ही अब कोविड-19 के टेस्ट के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए गाइडलाइन जारी की है. जानकारी के अनुसार रैपिड एंटीजन टेस्ट के लिए साउथ कोरिया की एक कंपनी की किट को सही पाया गया है. और इसका एक प्लांट मानेसर गुड़गांव में भी लगा है. बताया जा रहा है कि इस रैपिड टेस्टिंग के जरिए मरीज के नाक से सैंपल लिया जाएगा और 30 मिनट के अंदर इसके नतीजे घोषित हो जा जाएंगे. गाइड लाइन के अनुसार इस प्रणाली से टेस्टिंग कंटेनमेंट जोन में इससे टेस्टिंग की जाएगी. Also Read - India Coronavirus situation live Update: कोरोना से मचा कोहराम, टूटे सारे रिकॉर्ड, 24 घंटे में सामने आए सर्वाधिक 27 हजार से अधिक मामले, पढें रिपोर्ट्स

गाइडलाइन में कहा गया है कि बुखार के लक्षण वाले हर व्यक्ति का टेस्ट किया जा , किसी पॉजिटिव व्यक्ति के संपर्क में आए लोगों का भी टेस्ट किया जाए कंटेनमेंट जोन में रहने वाले हाई रिस्क ग्रुप जैसे कैंसर और किडनी के गंभीर मरीजों का भी टेस्ट किया जाए. Also Read - त्वचा रोग के इलाज में उपयोग आने वाला ये इंजेक्‍शन अब कोरोना मरीजों को लगाया जाएगा

रैपिड एंटिजन टेस्टिंग के लिए अस्पतालों के लिए भी गाइडलाइन जारी हुई है. गाइडलाइन में हेल्थ केयर वर्कर की टेस्टिंग केलिए भी कहा गया है. हाई रिस्क ग्रुप्स जैसे कि कैंसर के मरीज या किसी और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों का भी टेस्ट किया जाए. अगर किसी का टेस्ट निगेटिव आता है तो rt-pcr टेस्ट के जरिए दोबारा कंफर्म किया जाए अगर टेस्ट पॉजिटिव आता है तो उसे पॉजिटिव ही माना जाए दोबारा टेस्ट की जरूरत नहीं है.