नई दिल्ली: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कहा कि लोकतंत्र और गणतंत्रवाद ऐसी दो चीजें हैं जिनकी लोगों को रक्षा करनी चाहिए और उन्हें बढ़ावा देना चाहिए. उन्होंने कहा कि पहचान की राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों को गहरा करने में सकरात्मक भूमिका निभाती है. Also Read - नागरिकों की स्वतंत्रता पर ‘कार्रवाई’! EIU लोकतंत्र सूचकांक में 53वें स्थान पर फिसला भारत, पाकिस्तान से काफी आगे

मुखर्जी ने यहां भारतीय छात्र संसद में कहा, ‘‘भारत में लोकतंत्र ने पहचान आधारित राजनीति को बढ़ावा दिया. लोकतंत्र को मजबूत करने के चश्मे से अगर मैं देखूं तो मुझे यह सकारात्मक बदलाव दिखता है क्योंकि इससे व्यापक प्रतिनिधित्व होता है, लेकिन जाति और समुदाय के आधार पर विभाजित मतदाता ध्रुवीकृत जनादेश देते है.’’ Also Read - मोदी ने लोकप्रियता से हासिल किया प्रधानमंत्री का पद, मनमोहन को सोनिया से मिला : 'द प्रेसिडेंसियल ईयर्स' में प्रणब मुखर्जी

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